केंद्र की कड़ी हिदायत के बाद धामी ने चुप्पी तोड़ी
द संडे मेल
नई दिल्ली।दिल्ली से कड़ी हिदायत के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को देहरादून में मीडिया के सामने चुप्पी तोड़ी।सीएम धामी की कही बातों का कुल मतलब यही निकाला जा रहा है कि वह जल्द ही सीबीआई जांच की सिफारिश केंद्र सरकार से कर सकते हैं।अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए उत्तराखंड लगातार 15 दिनों से सड़कों पर है।देहरादून में मुख्यमंत्री आवास के घेराव के बाद आंदोलनकारियों ने 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वाहन किया हुआ है।दिल्ली में ऐसी चर्चा है कि उससे पूर्व सीबीआई जांच की घोषणा हो जाए।क्योंकि बंद के सफल होने के पूरे आसार हैं।बंद को कांग्रेस के साथ सभी विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का पूरा समर्थन मिल रहा है।आलाकमान पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए।आलाकमान अब इस कोशिश में जुट गया है कि किसी तरह से पहले आंदोलन समाप्त करवाया जाए।फिर बाद में जिस पर जो एक्शन करना है करा जाए।
आलाकमान को प्रदेश बीजेपी के सभी वरिष्ठ नेताओं ने आंदोलन को लेकर आगाह किया हुआ था।सीएम एक दिन पहले दिल्ली में ही थे।आलाकमान को आभास हो गया था कि राज्य के हालात ठीक नहीं है।सूत्रों का कहना है कि इसलिए सीएम को निर्देश दिए गए कि वह पहले अपनी बात रख स्थिति स्पष्ट करें। मुख्यमंत्री धामी ने अंकिता के माता पिता के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए कहा कि सरकार ने अपनी तरफ से पूरी जांच करवा दोषियों को सजा दिलवा दी है।कथित ऑडियो को लेकर प्रदेश में अनावश्यक रूप से माहौल बनाया जा रहा है।धामी ने दोहराया कि उनकी सरकार बेटियों की सुरक्षा,न्याय ओर सम्मान के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।सवाल पूछे जाने पर धामी ने पत्रकारों से सबूत मांगे।

सड़कों पर महिलाएं
दरअसल बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के ऑडियो में राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम,अजय कुमार का नाम सामने आया था।उर्मिला ने सोशल मीडिया में अपने वीडियो जारी कर इन दोनों नेताओं के नाम उजागर करने के साथ सरकार पर भी सवाल खड़े किए थे।उर्मिला के इन वीडियो ने उत्तराखंड की राजनीति को गर्मा दिया।कांग्रेस ने सीबीआई की जांच की मांग कर आंदोलन शुरू कर दिया।इस आंदोलन को सभी राजनीतिक दलों,सामाजिक संगठनों का खुल कर साथ मिला हुआ है।सीएम धामी की भूमिका इसलिए सवालों के घेरे में है कि उन्होंने उस रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलवा दिया जहां अंकिता काम करती थी।कांग्रेस ने धामी पर सबूत नष्ट करने का आरोप लगा इस्तीफे की मांग भी की हुई है। अंकिता की 2022 में हत्या कर दी गई थी।पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।जिन्हें अदालत ने उम्र कैद की सजा दी।लेकिन हत्याकांड में वीआईपी की चर्चा होने और तीन साल बाद नाम उजागर होने से राजनीति गरमाई।

अंकिता को न्याय दिलवाने के लिए मुंडन करवाती महिला कांग्रेस की नेत्रियां






