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सीएम और मंत्रियों का आमजन के बीच निकलना हुआ मुश्किल

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अंकिता को न्याय दिलाने  मेट्रो में भी प्रदर्शन,मुद्दा राष्ट्रीय स्तर हुआ
द संडे मेल
नई दिल्ली। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी , उनके मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ बढ़ते रोष के चलते बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व पर राज्य में बदलाव का दबाव बढ़ता जा रहा है।दिल्ली और दूसरे राज्यों में युवक कांग्रेस ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को मुद्दा बना बीजेपी पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा हमला शुरू कर दिया है।दिल्ली की मेट्रो में बकायदा अंकिता के पोस्टर दिखा न्याय की मांग करते युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता देखे जा सकते हैं।बीजेपी आलाकमान भी पार्टी की बिगड़ती छवि से परेशान भी है और गुस्से में भी है।सूत्र बताते हैं कि सीएम धामी और उनके मंत्रियों के लिए नया साल बहुत शुभ नहीं रहने वाला है।

आलाकमान आने वाले महीनों में कभी भी बदलाव का फैसला कर सकता है।जो संकेत मिल रहे हैं गैर विधायक को प्रदेश की कमान सौंपी जाएगी।फरवरी से चुनाव साल शुरू हो जाएगा।फरवरी या मार्च में बीजेपी की नई कार्यकारिणी गठित होगी।उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी टीम में भी बदलाव करेंगे।तभी राज्यों को लेकर बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।समझा जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान तभी सीएम धामी के भविष्य का फैसला करेगा।

 

 अंकिता हत्याकांड ने बीजेपी की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।उन्नाव रेप कांड और अंकिता हत्याकांड से विपक्ष को बीजेपी के खिलाफ बड़ा मुद्दा मिल गया है।उन्नाव रेप कांड के मुख्य अभियुक्त कुलदीप सेंगर को हाईकोर्ट से मिली राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा सरकार को राहत जरूर दे दी।लेकिन मामला गरमा गया।उन्नाव रेप कांड की पीड़िता की मदद कर रहे सामाजिक संगठनों ने अब अंकिता की न्याय की लड़ाई शुरू कर दी।

अंकिता हत्याकांड नेशनल मुद्दा बनता जा रहा है।इस बीच उत्तराखंड में आंदोलन कर रही जनता ने सीएम,मंत्रियों और बीजेपी विधायकों के खिलाफ राज्यवार प्रदर्शन शुरू कर दिया है।जो जहां मिल रहा है उसका घेराव कर रहे है।स्पीकर ऋतु खंडूरी की वेशभूषा पहना  महिला कांग्रेस ने उनका प्रतिकात्मक घेराव किया और इस्तीफे की मांग की।जबकि सीएम धामी और मंत्री धनसिंह रावत के इस्तीफे की मांग कर जनता ने उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
 राज्य के अधिकाशं मंत्री और विधायक गायब हैं।जनता के डर से कोई कुछ नहीं बोल रहा है।बीजेपी की हालत यह है कि ब्राह्मण और राजपूत बाहुल्य राज्य में दलित राजनीति करने से भी बाज नहीं आई।बीजेपी ने आरोपित राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम को बचाने के लिए यह प्रपंच रचा जिसमें उन्हें मुंह की खानी पड़ी।आम जन का गुस्सा दुष्यंत गौतम और सीएम धामी के खिलाफ है।क्योंकि धामी ने सीएम रहते ही गेस्ट हाउस तुड़वाया।फिर सीबीआई जांच को रोकने के लिए अदालत में हलफनामे दिलवाए कि एसआईटी ओर उनकी पुलिस ठीक काम कर रही है।इससे जनता सीएम के खिलाफ गुस्से में ज्यादा है।आरोप लग रहे हैं कि  सीएम धामी ने यह सब पार्टी के वीआईपी नेता को बचाने के लिए किया जिससे दिल्ली में वह मजबूत हो सकें।
सभी फोटो सोशल मीडिया से लिए गए हैं।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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