
नई दिल्ली।उत्तराखंड अंकिता भंडारी हत्याकांड की आग में झुलस रहा है दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी जेहाद की राजनीति को धार देने में जुटे हैं।ऐसा लगता है कि सीएम धामी संघ को खुश कर अपनी कुर्सी बचाने की जुगत में लगे हैं।उत्तराखंड में बेरोजगार छात्रों ने पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन किया तो सीएम धामी ने नया शब्द नकल जेहाद की खोज कर छात्रों के आंदोलन को भी हिन्दू मुस्लिम करने की कोशिश की थी।हालांकि इस शब्द से उनकी बड़ी फजीहत हुई थी।अब जब एक बार फिर उत्तराखंड आंदोलन से ग्रस्त है धामी ने एक बार फिर लैंड जिहाद की बात कही है।दिल्ली में एक नेशनल दैनिक द्वारा आयोजित शरदोत्सव कार्यकम में धामी ने यह बताने की कोशिश की कि उनसे पूर्व की सरकारों ने कोई काम नहीं किया। इसलिए वहां जमकर अतिक्रमण हुआ।जमीन पर कब्जे कर मदरसे बनाए गए।लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।उनकी सरकार अतिक्रमण हटाने में जुटी है।लैंड जेहाद की बात कर धामी ने एक विशेष समुदाय को टारगेट किया। ऐसा कर एक प्रकार से वह उत्तराखंड में हिंदू मुस्लिम की राजनीति को आगे बढ़ा अंकिता भंडारी हत्याकांड के आंदोलन को कमजोर करने की रणनीति में जुट गए हैं।







