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सीबीआई जांच की घोषणा के बाद भी धामी की मुश्किलें बढ़ी,राहुल ने भी उठाए सवाल

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कांग्रेस ने सीएम,गौतम और केंद्र को भी लपेटा
द संडे मेल
नई दिल्ली।अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने की घोषणा के बाद भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है।लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने एक्स पर कहा कि उत्तराखंड में अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया – लेकिन सवाल आज भी वही है: सत्ता का संरक्षण BJP के किस VIP को बचा रहा है? कानून सबके लिए बराबर कब होगा?राहुल के बीजेपी पर हमलावर होने के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड आंदोलन  समाप्त होगा लगता नहीं है।जिस उत्तराखंड बंद के दबाव में सीबीआई जांच की घोषणा की गई वह बंद टलता नहीं दिख रहा है।
कांग्रेस ने अपनी पीसी में दिखाया इन वीडियो को

 

इस बीच कांग्रेस ने यहां पार्टी मुख्यालय मेंबीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व, मुख्यमंत्री धामी और प्रभारी दुष्यंत गौतम के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है।कांग्रेस ने तो बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को भी लपेटे में लेने की कोशिश करते हुए कहा कि उस व्यक्ति का नाम भी सामने आना चाहिए़ जो आरोपियों को बचाने में लगा है।कांग्रेस ने कहा कि सीबीआई जांच मौजूदा सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जल्द से जल्द पूरी होनी चाहिए़।कांग्रेस ने कहा उनकी यह मांग अभी भी बरकरार है।
 कांग्रेस ने शनिवार को यहां पहली बार अपनी राष्ट्रीय स्तर की नेता को अंकिता मामले के लिए मैदान में उतारा।सोशल मिडिया से ही बयान दे औपचारिकता निभा रही महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा खुल कर सामने आई।अलका ने कहा कि हम अपनी उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी न्याय दिलाने की लड़ाई के  मुद्दे पर आज यहां 24 अकबर रोड में आए हैं।अलका ने पूरे प्रकरण में सीएम धामी पर तो सवाल उठाए ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी लपेट लिया ।क्योंकि धामी ने सीएम योगी से प्रभावित हो उस विवादास्पद रिसॉर्ट को बुलडोजर से तुड़वा सारे सबूत नष्ट कर दिए थे।कांग्रेस के रुख से साफ है कि मुख्यमंत्री धामी के इस्तीफे और वीआईपी की गिरफ्तारी से कम पर कोई समझौता नहीं होगा।कांग्रेस अब सीएम धामी के इस्तीफे और वीआईपी की गिरफ्तारी को बड़ा मुद्दा बना आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जा सकती है।रविवार बंद के बाद कांग्रेस  आंदोलन को जारी भी रख सकती है।
लांबा ने  अंकिता के बारे में शुरू से जानकारी देते हुए बताया कि बीजेपी नेता विनोद आर्य के रिसॉर्ट में अंकिता की नौकरी 18 अगस्त 2022 में लगी महीने भर के अंदर ही 18 सितंबर को वीआईपी को अनैतिक सेवाएं देने का दबाव बढ़ा दिया गया।बहादुर अंकिता सेवाएं देने से मना कर देती है और उसकी हत्या कर शव चिल्ला नहर में फेंक दिया जाता है।5 दिन तक कोई एफआईआर नहीं होती है।फिर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होती है।स्थानीय विधायक रेणु बिष्ट ने साफ बताया था कि सीएम के आदेश पर रिसॉर्ट गिराया गया।अलका बताती है कि 23 सितंबर को रिसॉर्ट इसलिए गिराया गया जिससे सारे सबूत नष्ट कर दिए जाएं।क्योंकि सरकार जानती थी कि अंकिता वहां रहती थी सब कुछ वहां मौजूद था।इसलिए धामी ने योगी से प्रभावित हो बुलडोजर से सबूत नष्ट कर दिए।24 सितंबर 2022 को अंकित का शव मिलता है।अंकिता के माता पिता और जनता के गुस्से को देख बीजेपी विधायक विनोद आर्य के बेटे पुलिकत आर्य समेत तीन जनों को गिरफ्तार किया जाता है।कांग्रेस  इस लड़ाई को तब तक जारी रखेगी जब तक अंकिता के असल वीआईपी नहीं पकड़े जाते है।कांग्रेस ने आज की पीसी में कई वीडियो दिखाए और जारी भी किए।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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