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नितिन नवीन करेंगे उत्तराखंड का बड़ा फैसला

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20 जनवरी को बन जाएंगे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
द संडे मेल
नई दिल्ली।कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन 20 जनवरी को बीजेपी के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए जाएंगे।इस तरह लगातार 6 साल तक अध्यक्ष पद संभालने वाले जे पी नड्डा पूर्व अध्यक्ष बन जाएंगे। नितिन नवीन के सामने भी लगभग वही चुनौतियां हैं जो 2020 में नड्डा के अध्यक्ष बनने के समय थी।नड्डा के भी अध्यक्ष बनते ही कई राज्यों में चुनाव हुए और कई में नेतृत्व बदले गए।गुजरात,त्रिपुरा के साथ एक अहम राज्य था उत्तराखंड जहां बदलाव हुए।नड्डा के 2020 में अध्यक्ष बनते ही सबसे बड़ा फैसला उत्तराखंड को लेकर ही किया गया था।6 माह में तीन सीएम बदले गए। त्रिवेंद्र रावत को मार्च 2021 में हटा तीरथ सिंह रावत को सीएम बनाया गया था।लेकिन तीरथ सिंह 6 माह भी सीएम नहीं रह पाए और 3 जुलाई 2021 को पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने।
  हालांकि 6 माह बाद हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी तो जीत गई लेकिन धामी सीएम रहते हुए अपनी सीट खटीमा से चुनाव हार गए।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धामी को फिर मौका दे उत्तराखंड का सीएम तो बना दिया,लेकिन वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे।उसका ही परिणाम है कि धामी का पार्टी के भीतर ही भारी विरोध होने लगा।अलग से बीजेपी को जनता का आक्रोश झेलना पड़ रहा है।जनता के साथ अपने ओर गैर सभी सीएम धामी और उनकी सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं।सांसद त्रिवेंद्र रावत,पूर्व सांसद तीरथ सिंह रावत,पूर्व मंत्री और विधायक अरविंद पाण्डे ने अपनी सरकार पर सवाल खड़े किए। यही नहीं लैंसडाउन के विधायक दिलीप रावत ने तो अपनी सरकार के रवैए से त्रस्त हो इस्तीफे की धमकी तक दे डाली।उत्तराखंड के हालात बहुत ही चिंताजनक बने हुए हैं।
  नितिन नवीन के लिए उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य होगा जहां पर सबसे ज्यादा चुनौतियां उन्हें फेस करनी होगी।देवभूमि उत्तराखंड को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। लेकिन बीते डेढ़ साल से आंदोलनों के चलते राज्य में बीजेपी के खिलाफ भारी नाराजगी उपजी।नाराजगी के कई कारण है।आमजन भ्रष्टाचार से त्रस्त है।खनन माफिया,होटल माफिया,जमीन माफिया और शराब माफिया का राज्य में जाल फैला है।शराब माफिया के खिलाफ जनता को सड़कों पर उतरना पड़ा।अभी हाल में सीएम धामी के इलाके उधम सिंह नगर में एक किसान सुखवंत की आत्महत्या ने किसान राजनीति को गर्मा दिया है।किसान ने मरने से पूर्व पुलिस प्रशासन और जमीन माफिया की साठगांठ को उजागर किया है।जिससे किसानों में भी भारी रोष है।इसके साथ बीते पांच साल में राज्य सरकार की तरफ मूल सुविधाओं की पूरी तरह अनदेखी की गई।बिजली,पानी,सड़क,शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाओं के अभाव के चलते जनता सड़कों पर उतरी।युवा पेपर लीक को लेकर सड़कों पर उतरे ।सरकार के खिलाफ पूरे राज्य में युवा सड़कों पर उतरा फिर सरकार को सीबीआई जांच स्वीकारनी पड़ी।
 इसके साथ अंकिता भंडारी हत्याकांड ने तो पूरे देश में बीजेपी की छवि को नुकसान पहुंचाया है।बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व पर सवाल खड़े हुए हैं।अभी मामला खत्म नहीं हुआ है।इस बीच किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या का मामला ओर गरमा गया है।उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की अगुवाई में कांग्रेस ने शुक्रवार को देहरादून में पुलिस मुख्यालय का घेराव तक किया।सीबीआई जांच की मांग की।सुखवंत की आत्महत्या से किसानों में भारी रोष है।उधर अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी का नाम सामने आने और सीएम धामी के रवैए से महिलाओं में भारी आक्रोश है।इस बीच राज्य की एक मंत्री रेखा आर्य के पति का बिहार में लड़कियों खरीदी जाती हैं जैसी टिप्पणी ने बिहार की राजनीति तक असर डाला है।आलाकमान के पास हर तरह की रिपोर्ट पहुंची हुई है।समझा जा रहा है कि नितिन नवीन की नई टीम के गठन के समय पीएम उत्तराखंड को लेकर बड़ा बदलाव करें।नितिन के अध्यक्ष बनने के बाद राज्यों पर फोकस किया जाएगा।समाप्त
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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