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उत्तराखंड बीजेपी में मचेगी भगदड़

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पूर्व सीएम रावत का दावा नेताओं में भारी नाराजगी
द संडे मेल
देहरादून।उत्तराखंड बीजेपी में क्या बड़ी टूट होने जा रही है? पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की माने तो ऐसा होने जा रहा है।अपने एक्स में रावत ने कहा है कि बीजेपी से बड़ी संख्या में नेता कांग्रेस में आने को तैयार हैं।इनमें वे नेता भी शामिल हैं जो पिछली बार कांग्रेस छोड़ कर चले गए थे।पार्टी जल्द ही बड़ा अभियान चला बीजेपी से आने वाले नेताओं को शामिल करेगी।अगर उत्तराखंड बीजेपी में वाकई टूट होती है तो कहीं ना कहीं बीजेपी का मौजूदा नेतृत्व इसके लिए जिम्मेदार होगा।क्योंकि इस समय राज्य में बीजेपी के खिलाफ माहौल बना हुआ है।आलाकमान चुप बैठ तमाशा देख रहा है।बीजेपी में अंदरखाने नाराजगी की सबसे बड़ी वजह यही मानी जा रही है कि अपनी सरकार होते हुए भी नेताओं और कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं मिल रहा है।प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट हों या मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दोनों के खिलाफ नेताओं में नाराजगी कई बार खुल कर सामने आई है।नाराजगी के कई मुद्दे हैं।
  अपने एक्स पर पोस्ट करते हुए हरीश रावत ने कहा है कि इस समय कांग्रेस पार्टी में सम्मिलित होने वालों की बड़ी कतार लगी हुई है और अधिकांश लोग भाजपा से आने वाले हैं।महेंद्र भट्ट जी को खैरियत मनानी चाहिए कि पहले अपने घर को संभालें, तब इतने बड़े दावे करें। क्योंकि जो लोग सत्ता के लोभ में या किसी दबाव में चले गए थे, वे भी अब देख रहे हैं कि कुछ बदला नहीं है। लोग निराश हैं और उत्तराखंड में आम जनमानस में स्पष्ट नाराज़गी है।ऐसे लोग अब निराश होकर कांग्रेस में सम्मिलित होना चाहते हैं। शीघ्र ही हम इस प्रकार का अभियान प्रारंभ करेंगे और मुंहतोड़ जवाब देंगे, ताकि भाजपा को यह भलीभांति समझ में आ सके कि उनके अपने घर की वास्तविक स्थिति क्या है।हालांकि हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में सीएम धामी को लेकर कोई जिक्र नहीं किया है।केवल बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भट्ट को टारगेट किया है।लेकिन बीजेपी में अगर भगदड़ मचती है तो भट्ट से ज्यादा सीएम धामी की कार्यप्रणाली से नाराज हो नेता बीजेपी छोड़ेंगे।सीएम धामी एकला चलो की नीति पहले दिन से ही अपनाए हुए हैं।कई बार आरोप भी लगते रहे हैं कि गढ़वाल के साथ खुल कर भेदभाव किया जा रहा है।हालांकि इसके बाद भी सीएम धामी कुमायूं मंडल में पनपी नाराजगी को कम नहीं कर पा रहे हैं।गढ़वाल के साथ भेदभाव हुआ है इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।केंद्र ने भी फैसले के समय कुछ ऐसा ही किया है। मुख्यमंत्री भी कुमायूं से ,केंद्र सरकार में मंत्री भी कुमायूं से ही बनाया गया है।विकास से संबंधित फैसलों के समय भी भेदभाव हुए हैं।कांग्रेस जानती है कि गढ़वाल मंडल से सबसे ज्यादा 41 सीट जबकि कुमायूं से केवल 29।कांग्रेस अपना पूरा फोकस गढ़वाल पर केंद्रित करने जा रही है।जबकि बीजेपी अंदरूनी लड़ाई में उलझी हुई है।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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