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राहुल के दांव से उत्तराखंड बीजेपी में बदलाव का दबाव बढ़ा

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आलाकमान उठा सकता है बड़ा कदम

द संडे मेल
नई दिल्ली।लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक दांव ने उत्तराखंड में बीजेपी को बड़े संकट में डाल दिया है।राहुल के इस दांव के बाद बीजेपी आलाकमान पर भी राज्य में बदलाव का दबाव बढ़ गया है।राहुल गांधी ने  गढ़वाल मंडल के तीन बड़े नेताओं को राज्य की जिम्मेदारी दे चुनाव साल में पार्टी संगठन को ताकत दी है।यही नहीं कांग्रेस ने इन नियुक्तियों से जातीय समीकरणों को भी साध इससे बीजेपी में भी बदलाव को लेकर हलचल बढ़ा दी है।प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ब्राह्मण हैं तो प्रतिपक्ष के नेता यशपाल आर्य दलित हैं।इसी तरह आदिवासी इलाके के प्रीतम सिंह को अभियान समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं तो राजपूत समाज के हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी देख रहे हैं।कांग्रेस के पास पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी राजपूत समाज के बड़े फेस है।इन नेताओं के मुकाबले बीजेपी हर मोर्चे पर कमजोर दिखती है।

  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के लिए इन नेताओं से पार पाना आसान नहीं।यूं भी मुख्यमंत्री धामी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे होने के कारण कांग्रेस के निशाने पर हैं।जहां तक महेंद्र भट्ट का सवाल है तो वह बहुत दमदार नेता नहीं माने जाते हैं।गढ़वाल से पार्टी को किसी ब्राह्मण को फेस बनाना था इसके चलते उन्हें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दे दी गई।बीजेपी आलाकमान की यही रणनीति रही है कि मुख्यमंत्री के सामने किसी कमजोर को अध्यक्ष बनाया जाता है।अधिकांश राज्यों में लगभग यही स्थिति है।
  कांग्रेस ने जातीय संतुलन के साथ क्षेत्रीय संतुलन को भी साधा है।गढ़वाल से तीन बड़े नेताओं को जिम्मेदारी दी है तो कुमायूं मंडल से दो अहम फेस पार्टी के पास हैं।पूर्व सीएम रावत और विधायक दल नेता आर्य कुमायूं से आते हैं।बाकी तीन नेता गढ़वाल है।विधानसभा की आधे से ज्यादा सीटें गढ़वाल से आती है।इसी के चलते कांग्रेस ने तीन बड़े नेताओं को जिम्मेदारी दे गढ़वाल पर फोकस किया है।मुख्यमंत्री धामी कुमायूं से आते हैं लेकिन सबसे ज्यादा विरोध उनका उनके मंडल में ही हो रहा है।कई शहरों में उनके खिलाफ धरने प्रदर्शन चल रहे हैं।यही स्थिति गढ़वाल मंडल में भी बनी हुई है।मुख्यमंत्री धामी बीते पांच साल में अपनी पकड़ पूरे उत्तराखंड में नहीं बना पाए।बीते एक साल में तो उनकी सरकार के खिलाफ पूरे प्रदेश में भारी नाराजगी देखी जा रही है।भ्रष्टाचार बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है।धामी के खिलाफ नाराजगी का नजारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपनी 9 नवंबर की रैली में देखा था।पब्लिक बीच में ही भाषण सुने बिना जाने लगी थी।आईबी ने उत्तराखंड की रिपोर्ट बहुत चिंताजनक बताई।बिहार में नीतीश कुमार की सरकार के गठन के बाद बीजेपी आलाकमान अब अपने कमजोर प्रदेशों में बदलाव करने की तैयारी में।उत्तराखंड भी कमजोर प्रदेशों में आता है।
 प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की छवि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुकाबले साफ सुथरी मानी जाती है।यह लगभग तय है कि अगर बीजेपी आलाकमान ने धामी को नहीं बदला तो कांग्रेस भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बना सरकार को घेरेगी।उत्तराखंड में मुख्यमंत्री धामी और उनकी सरकार के खिलाफ जबर्दस्त गुस्सा देखा जा रहा है।मौजूदा मंत्रियों और  विधायकों के लिए भी परिस्थितियां अनुकूल नहीं है।अभी से क्षेत्र में उनको विरोध का सामना करना पड़ रहा है।जनता का गुस्सा मूलभूत सुविधाओं को लेकर है।धामी सरकार ने भारत सरकार की योजनाओं पर फोकस रखा राज्य की समस्याओं की पूरी तरह से अनदेखी की।शिक्षा,स्वास्थ्य,बिजली,पानी और सड़कों की हालत बदहाल बनी रही।जिससे प्रदेश के अधिकांश इलाकों में सरकार के खिलाफ जनता को सड़को पर उतरना पड़ा। कानून व्यवस्था की स्थिति भी बद से बदहाल हो गई।पहाड़ माफियाओं के शिकंजे में आ गया।राज्य को बने 25 साल का होने को लेकर उत्तराखंड में कोई उत्साह नहीं है।बीजेपी के खिलाफ बढ़ते आक्रोश को देख कांग्रेस ने गोदियाल को फिर कमान सौंप ठीक ठाक दांव खेला है।धामी सरकार के खिलाफ पूरे उत्तराखंड में नाराजगी देखी जा रही है जिसका कांग्रेस को सीधा लाभ मिलेगा।अगर बीजेपी आलाकमान ने बदलाव कर नए फेस दिए तो फिर चुनाव दिलचस्प हो जाएगा।अभी कांग्रेस का पलड़ा भारी हो गया है।समाप्त
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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