best news portal development company in india

उत्तराखंडियों की विकास को लेकर उम्मीदें जगी 

SHARE:

खंडूरी की तरह बलूनी का भी पहाड़ पर है पूरा फोकस
द संडे मेल
देहरादून।गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की कार्यशैली और पहाड़ के प्रति उनके लगाव को देख पहाड़ी लोग उनमें पूर्व सीएम भुवनचंद खंडूरी की छवि देखने लगे हैं।बलूनी पहाड़ वासियों की पीड़ा को समझ अपनी हद में आने हर उस काम को कराने में लगे हैं जो वह कर सकते है।किसी भी फैसले में कोई भेदभाव भी नजर नहीं आता है।गढ़वाल और कुमायूं दोनों के साथ एक जैसा व्यवहार करते है।खंडूरी भी उत्तराखंड के ऐसे अकेले नेता थे जिन्होंने कभी कोई भेदभाव नहीं किया।उनके लिए राज्य का हर जिला अपना था।
खंडूरी पहाड़ वालों के लिए उम्मीद की किरण बन गए थे।लेकिन भ्रष्टाचारियों को उनकी यह राजनीति पसंद नहीं आई और उन्हें चुनाव हरवा दिया।फिर वह धीरे धीरे राजनीति से दूर होते चले गए।पहाड़ वालों को जब तक समझ में आता तब तक देर हो चुकी थी।नेता आए गए लेकिन पहाड़ के दर्द से किसी ने मतलब नहीं रखा।पिछले महीने खंडूरी का लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया था।उनके निधन के बाद पहाड़ के मौजूदा नेताओं को लेकर आमजन में यही चर्चा सुनने को मिलने लगी कि सांसद बलूनी कुछ कुछ खंडूरी जैसे काम करते दिख रहे है।बलूनी अपने काम से साबित भी कर रहे हैं कि वह असली पहाड़ी हैं।
  दरअसल  खंडूरी के राजनीति से दूर होने के बाद पहाड़ से कोई दूसरा ऐसा नेता उभरा ही नहीं जो पहाड़ और पहाड़ वालों का दर्द समझता हो।लेकिन खंडूरी के निधन के बाद  दो नेताओं की कार्यप्रणाली और सक्रियता से ऐसा लग रहा है कि उनके अंदर पहाड़ का दर्द छिपा हुआ है।मौका मिलेगा तो शायद कुछ करेंगे।उनमें पहले नंबर पर हैं गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी और दूसरे नंबर कांग्रेस के गणेश गोदियाल।गोदियाल की असल परीक्षा तो सत्ता मिलने के बाद होगी लेकिन अभी उनके भाषणों और बातों से लगता है कि वह पहाड़ का दर्द समझते हैं।लेकिन  बलूनी ने सांसद के रूप में साबित कर दिया है कि वह पहाड़वासियों की पीड़ा के साथ खड़े है।उनसे जो होगा वह करेंगे।बलूनी की कार्यप्रणाली और पहाड़ के लोगों के साथ उठने बैठने से ऐसा लगता है कि वह कुछ कुछ खंडूरी के रास्ते पर चल रहे हैं।ऐसा इसलिए कि खंडूरी जब जब सत्ता में रहे तो उन्होंने पहाड़ का ही ध्यान रखा।जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सड़क परिवहन मंत्री थे तो पहाड़ के मुख्य सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा।सड़कों का चौड़ी करण हुआ।जब मुख्यमंत्री बने तो पहाड़ वालों को राहत देने वाले तमाम कानून लाये ।भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त बनाया।जानकार कहते भी हैं कि 2012 खंडूरी फिर सीएम बन जाते तो उत्तराखंड में माफियाओं का कब्जा नहीं होता।अनिल बलूनी भी खंडूरी की तरह ही सांसद के रूप में पहाड़ की मूलभूत सुविधाओं को केंद्र की मदद से पूरी कराने के लिए ताकत लगाए हुए हैं।
  अपनी सरकार के केंद्रीय मंत्रियों से आग्रह कर पूरी कराते  हैं।सड़कों का मामला हो या नई ट्रेनें,ट्रेनों का विद्युतीकरण,विस्तारीकरण,पहाड़ों में केंद्रीय योजनाओं का पहुंचना।अपने संसदीय क्षेत्र के साथ हर जिले में जा कर संवाद करना।लोगों से मिलना जुलना।उनकी परेशानियों को नजदीक से समझना।हालांकि खंडूरी के मुकाबले बलूनी कम बोलते हैं।बस काम पर फोकस रखते हैं।खंडहर होते गांवों को आबाद करने की उनकी कोशिश रंग ला रही है।लोग पहाड़ों में अपने पुश्तैनी घरों को ठीक कर गांव आने लगे है।बलूनी ने पुश्तैनी घरों में जन्मदिन जैसे कार्यकम मनाने की अपील की थी।कई ऐसी कोशिशें हैं जिनसे लगता है कि अगर उन्हें खंडूरी की तरह केंद्र और राज्य में मौका मिला तो कुछ हट कर करेंगे।हाल में उनके एक फैसले से पहाड़वासी बहुत खुश है।उन्होंने साफ कर दिया संसद निधि का अगर पैसा चाहिए तो मिलजुल कर ऐसी योजनाएं बनाएं जिसका लंबे समय तक लाभ हो और पैसा भी ठीक जगह लगे।अभी तक होता यह रहा है कि ठेकेदार खड़ंजा और छोटे मोटे मार्ग को बनाने के नाम पर 5 से10 लाख रुपए लेते और उसमें बंदर बाँट कर दिखावे का काम करते।बलूनी के इस फैसले को आमजन सही मान रहे।काम हो तो मजबूत हो।इसी तरह मालवीय नगर अग्निकांड में गिरफ्तार शेफ़ केशव नेगी के मामले में उन्होंने तुरंत पुलिस कमिश्नर से बात की और निष्पक्ष जांच की माँग  कर जल्द छोड़ने को कहा।केशव की गिरफ्तारी से उत्तराखंड लोगों में गुस्सा है।दिल्ली में पहाड़ से जुड़े लोगों की मदद में भी बलूनी पीछे नहीं रहते हैं।उनकी कार्यप्रणाली से पहाड़ के लोग प्रभावित हैं।आमजन में चर्चा है कि सांसद रहते हुए अनिल बलूनी ने दो साल में अपनी अलग पहचान बनाई।अगर मौका मिला तो पहाड़ की सूरत बदल देंगे।पहाड़वासियों की उम्मीदें कब पूरी होती है इस पर सबकी नजरें है।लेकिन उम्मीद जरूर जग गई है कि खंडूरी की तरह कोई पहाड़ को समझने वाला नेता तो आया।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

Leave a Comment