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नितिन नबीन से उत्तराखंड को बड़ी उम्मीद

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बिना बदलाव के नहीं जीत पाएगी बीजेपी
द संडे मेल
नई दिल्ली।नितिन नबीन बीजेपी के 12 वें अध्यक्ष चुन लिए गए।इसकी घोषणा मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में की गई।इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत तमाम प्रमुख नेता,मुख्यमंत्री,प्रदेश अध्यक्ष और पदाधिकारी मौजूद थे।नितिन नबीन के सामने अप्रैल मई में होने वाले पांच राज्यों पश्चिम बंगाल,तमिलनाडु,पुडुचेरी, असम और केरल को जिताने की रहेगी।लेकिन इनसे ज्यादा अहम है उत्तर प्रदेश,पंजाब और उत्तराखंड में इन्हीं दिनों अगले साल होने वाले चुनाव रहेंगे।क्योंकि जिन पांच राज्यों में अभी चुनाव होने हैं उनमें असम ही बीजेपी ही अहम है।जिसमें वह वापसी करती दिख रही है।बाकी चार राज्यों में उसे अपनी स्थिति सुधारनी है।लेकिन असल चुनाव हैं उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के।दोनों हिंदी बेल्ट वाले हैं जिन्हें बीजेपी का गढ़ माना जाता है।इनमें उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इमेज के चलते पार्टी तीसरी बार भी वापसी करती दिख रही है।लेकिन उत्तराखंड में हालात इसके उल्ट हैं।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार के खिलाफ भारी नाराजगी है।मंत्री और विधायकों के बयान भी पार्टी की परेशानी बढ़ाने में लगे हैं।अंकिता भंडारी हत्याकांड और वीआईपी ने बीजेपी की फजीहत की हुई है।प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी बयानों के चलते भी बीजेपी निशाने पर हैं।अंकिता भंडारी हत्याकांड हो या दूसरे मामले भट्ट स्थिति संभाल नहीं पाए।

   अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया में बीजेपी नेताओं को लेकर अभी भी आपस ही ठनी हुई है।इस बीच पर्यावरणविद अनिल प्रकाश जोशी भी आरोपों में घिर गए हैं। हैस्को नाम का एनजीओ चलाने वाले जोशी उस समय सुर्खियों में आए जब उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड में अपनी तरफ से एफआईआर दर्ज कर दी।एक प्रकार से वह पार्टी बन गए।अब उन पर आरक्षित वन भूमि कब्जाने का आरोप लगा है।इस मामले के साथ वीआईपी की गिरफ्तारी बड़ा मुद्दा है।क्योंकि  सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर की सोशल मीडिया में वायरल हुई बातचीत में वीआईपी समेत  कई नेताओं के नाम सामने आने से ही आंदोलन खड़ा हुआ था। सीबीआई जांच की घोषणा के बाद भी आमजन का वीआईपी और सीएम धामी के प्रति गुस्सा बरकरार है।क्योंकि जो रिसॉर्ट  अंकिता हत्याकांड से जुड़ा था उसे सरकार के इशारे पर गिरा दिया गया।कांग्रेस का सीधा आरोप है वीआईपी को बचाने के लिए रिसॉर्ट को गिरा सारे सबूत नष्ट कर दिए गए।यह बात पूरे उत्तराखंड में घर कर गई है।इसके चलते बीजेपी के खिलाफ नाराजगी बढ़ी है।महिलाओं में भारी आक्रोश है।
  उधर  उधम सिंह नगर के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या से किसानों में भारी नाराजगी है।सुखवंत सिंह ने मरने से पूर्व जमीन माफिया और पुलिस की मिलीभगत का भंडा फोड़ कर सरकार पर सवाल खड़े कर विपक्ष को एक ओर बड़ा मुद्दा दे दिया।विपक्ष सीबीआई की मांग कर रहा है।पेपर लीक,अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद किसान की आत्महत्या का ऐसा मामला है जो सीबीआई की मांग को लेकर तूल पकड़ता जा रहा है।किसान संगठनों ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी है।इस बीच बीजेपी के
विधायक भरत चौधरी के बिगड़े बोलों ने पार्टी की परेशानी ओर बढ़ा दी है।मंत्रियों का जगह जगह विरोध जारी है।राष्ट्रीय अध्य्क्ष  नितिन नबीन के लिए आज के दिन सबसे बड़ी चुनौती उत्तराखंड ही है।आमजन उम्मीद कर रहा है कि अध्यक्ष के चुनाव के बाद आलाकमान उत्तराखंड की तरफ ध्यान देगा।वहां पर बीजेपी की हालत बहुत खराब है।आलाकमान ने मौजूदा नेतृत्व नहीं बदला तो हिन्दी बेल्ट में पार्टी की पहली बड़ी हार होगी।हालांकि फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे लेकिन अध्यक्ष होने के नाते नितिन को संगठन को लेकर भी फैसला करना होगा।समाप्त
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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