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प्रधान के इस्तीफे ने धामी और भट्ट का टेंशन बढ़ाया

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मानसून सत्र के बाद पीएम मोदी करेंगे फैसला
द संडे मेल
नई दिल्ली।पेपर लीक प्रकरण को लेकर बीजेपी की उत्तराखंड को लेकर चिन्ता बढ़ गई है।पार्टी के ऊपर राज्य में बदलाव को लेकर दबाव बढ़ा है।हालांकि  सोमवार को देहरादून में संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने संघ और प्रदेश के नेताओं के साथ बैठक कर चुनाव रणनीति को लेकर गहन मंथन किया लेकिन नेताओं का मन भी टटोला।बीजेपी की चिन्ता इस बात को लेकर है कि राज्य में युवाओं का आंदोलन जारी है।कांग्रेस उसे बढ़ावा दे रही है।दूसरा सीएम पुष्कर सिंह के कार्यकाल में पिछले साल पेपर लीक को पहला बड़ा युवाओं का  आंदोलन उत्तराखंड में ही हुआ था।केंद्र के दखल के बाद राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति दी थी।लेकिन सीबीआई की जांच में अभी तक कुछ निकला नहीं और ना ही कोई गिरफ्तारी हुई।कांग्रेस इस मुद्दे को हर हाल में तूल देगी।प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल कहते हैं कि पेपर लीक और बेरोजगारी कांग्रेस का बड़ा मुद्दा है।धामी के कार्यकाल में राज्य में बेरोजगारी का प्रतिशत बढ़ा है।

 

 उत्तराखंड में बीजेपी के सामने तमाम ऐसे मुद्दे हैं जिनका कोई तोड़ उनके पास नहीं है।बिगड़ी कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार,महिलाओं पर अत्याचार के बढ़ते मामले, बेरोजगारी,स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बेहाल,पुलिस में भ्रष्टाचार यह सब ऐसे मामले हैं जो सीधे राज्य सरकार से जुड़े हुए हैं।अंकिता भंडारी हत्याकांड में बीजेपी के नेताओं के नाम की चर्चा।सबसे अहम बीजेपी की मौजूदा राज्य सरकार के कार्यकाल में क्षेत्रवाद की राजनीति जमकर हुई है।दर्जनों मामले हैं जिसमें सीएम धामी ने खुल कर कुमायूं का पक्ष लिया।मंडी परिषद के तहत बनने वाली सड़को का एक डाटा तो सावर्जनिक हो चुका है।1700 से ज्यादा सड़कों में से 1200 से ज्यादा कुमायूं रीजन में बनाई गई।बाकी कई और मामले है।सारी जानकारी बीजेपी आलाकमान के पास पहुंच चुकी है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के देहरादून दौरों के बाद माना जा रहा था कि उत्तराखंड में सब कुछ ठीक ठाक है।आलाकमान कुछ नहीं करने जा रहा है।लेकिन काकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद जिस तरह केंद्र में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।उसके बाद आलाकमान अब कोई खतरा मोल लेने की स्थिति में नहीं है।उत्तराखंड उसके निशाने पर है।क्योंकि लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम की सफलता और युवाओं के बढ़ते प्रदर्शन ने बीजेपी को चिन्ता में डाला हुआ।पेपर लीक आंदोलन के बाद  उत्तराखंड समेत पांच राज्यों में चुनाव होने है।उत्तर प्रदेश, गोवा और मणिपुर को लेकर कोई टेंशन नहीं है।पंजाब में बीजेपी सत्ता में आने की कोशिश करेगी। लेकिन उत्तराखंड में तीसरी बार वापसी बड़ी चुनौती बन चुका है।इसलिए आलाकमान पर राज्य नेतृत्व में बदलाव का दबाव बढ़ गया है।मानसून सत्र के बाद पीएम नरेंद्र मोदी बदलाव को लेकर फैसला कर सकते है।प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट हों या मुख्यमंत्री धामी दोनों के नेतृत्व में चुनाव होंगे इसको लेकर आशंका जताई जाने लगी है।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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