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पीएम मोदी के फैसलों से पता चलेगा उत्तराखंड की रणनीति का

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नितिन नबीन की एक और बैठक में नया कुछ नहीं निकला
द संडे मेल

नई दिल्ली।उत्तराखंड को लेकर भारतीय जनता पार्टी की बुधवार को यह एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन,संगठन महामंत्री बी एल संतोष, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत पार्टी के लगभग सभी प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए।सूत्रों की माने तो कुछ नेताओ ने बैठक में प्रदेश के मौजूदा हालातों पर गहरी चिंता जताई।सबकी यही चिन्ता थी कि आमजन की नाराजगी से कैसे निपटा जाए।बाकी बैठक में ऐसा कुछ निकल कर नहीं आया जो खबर लायक होता।  हाल ही में दिल्ली में हुए युवाओं के आंदोलन को लेकर पार्टी नेतृत्व चिंतित दिखाई दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नेताओं और पदाधिकारियों से साफ कहा कि युवाओं के मुद्दों पर गंभीरता से काम किया जाए और उनके बीच पार्टी की सक्रियता बढ़ाई जाए।पेपर लीक उत्तराखंड में बड़ा मुद्दा है। धामी सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं किया जिससे युवाओं में नाराजगी कम होती।अब पार्टी युवाओं को कैसे राजी करेगी।इस पर नजर रहेगी। हालांकि सांसदों और वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंप नाराजगी दूर करने को कहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि नितिन नवीन और संगठन महासचिव की अब तक हुई बैठकों से आखिर क्या निकलेगा? क्योंकि उत्तराखंड में मौजूदा हालात बीजेपी सरकार के पक्ष में दिखाई नहीं दे रहे हैं।राज्य में सत्ता विरोधी माहौल लगातार मजबूत होता दिख रहा है।धामी सरकार सीधे निशाने पर है।

  बीजेपी की वास्तविकता यह है कि बीजेपी में बड़े और निर्णायक फैसले अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही करते हैं। ऐसे समय में, जब संसद का मानसून सत्र लगातार विपक्ष के हंगामे की वजह से प्रभावित हो रहा है, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रधानमंत्री मोदी अगला बड़ा राजनीतिक कदम कब और कैसे उठाते हैं। विशेष रूप से युवाओं के बीच बीजेपी की जो छवि कमजोर हुई है, उसे पार्टी किस तरह फिर से मजबूत करती है।उत्तराखंड उन राज्यों में है, जहां बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश करेगी। लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के कई फैसलों को लेकर जनता में भारी नाराज़गी दिखाई देती है। सरकार पर भेदभावपूर्ण फैसलों के आरोप लगातार लग रहे हैं। महिला सुरक्षा बड़ा मुद्दा बन चुका है और भ्रष्टाचार भी जनता के बीच एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी युवाओं को लेकर दिए गए अपने एक बयान के कारण विवादों में हैं। ऐसे में केवल संगठन को एकजुट रहने का संदेश देने से स्थिति बदलने वाली नहीं है। इसके लिए पार्टी को शीर्ष स्तर पर बड़े और प्रभावी फैसले लेने होंगे।अब सबकी निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हैं। माना जा रहा है कि संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर बदलाव जल्द हो सकते हैं। नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम का गठन अभी तक नहीं हुआ है, जबकि उन्हें अध्यक्ष बने कई महीने हो चुके हैं। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में होने वाले संभावित फेरबदल का असर भी उत्तराखंड सहित सभी चुनाव वाले राज्यों पर पड़ सकता है।दूसरी ओर, कांग्रेस भी बीजेपी को कड़ी चुनौती देती नजर आ रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल भले ही सीमित संसाधनों के साथ संघर्ष कर रहे हों, लेकिन सरकार के खिलाफ जनता के बीच जो असंतोष है, उसका लाभ कांग्रेस उठाने की कोशिश कर रही है।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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