सावन बरवाल ने दिलाई भारत के लिए ऐतिहासिक सफलता
डॉ.श्रीकृष्ण शर्मा
नई दिल्ली। सावन बरवाल को एशियन खेलों के पुरूष मैराथन मुकाबले में रजत पदक जीतकर 44 साल के पदक के सूखे को खत्म करके एक उपलब्धि और जोड ली, जो उनके लिए ही नहीं भारत के लिए गौरव की बात है। हिमाचल प्रदेश के मंडी के निवासी सावन बरवाल की यह रजत पदक की सफलता उभरती भाररतीय खेल प्रतिभाओं को जरूर उत्साहित कर रही होगी। क्योंकि यह रजत पदक ही कामयाबी पुरुषों की मैराथन में नया नेशनल रिकॉर्ड बनाकर हासिल की गई है। भारत के लिए सावन का यह रजत पदक इसलिए अहम् हो जाता है कि यह उन एशियाई खेलों में जीता जो भारत के बाहर आयोजित हुए हैं। इससे पहले जो पदको की सफलता एशियाई खेलों में मैराथन के साथ जुडी वे नई दिल्ली में 1951 और 1982 में आयोजित किए गए थे। यहां नई दिल्ली में 1951 में छोटा सिंह ने स्वर्ण और सूरत सिंह माथुर ने कांस्य जीतकर सिलसिले की अच्छी शुरूआत की थी। फिर 1982 में यहीं पर आयोजित किए एशियन खेलों में होसुर कुक्कप्पा सीथारण ने कांस्य पदक जीतकर भारतीय ताकत की मौजूदगी साबित की है। 1982 एशियाई खेलों के अब 2026 में पदक के इंतजार को सावन बरवाल ने रजत जीतकर खत्म करने के साथ साथ यह साबित करने का सफल प्रयास किया है कि यदि सही दिशा में व्यवस्थित प्रशिक्षण मुहैया कराया जाए तो ऐसी कामयाबी भारत की प्रतिभाएं जोडने को तैयार हैं। इससे पहले सावन की उपलब्धियां में 2023 एशियन हाफ मैराथन चैंपियनशिप, दुबई हाफ मैराथन में कांस्य पदक, 2025 नेशनल गेम्स, उत्तराखंड में 5000 मी में स्वर्ण पदक और 10,000 मी में स्वर्ण पदक की कामयाबी शामिल हैं। 18 फरवरी 1998 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदरनगर के रडाभांकर गांव में जन्में सावन बरवाल कडी मेहनत आज रंग ला रही है। जिसके चलते उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि और जोड ली। ( खेल संपादक )







