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भ्रष्टाचार के चलते उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था भी चरमराई

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बच्चों से मजदूरों जैसा काम

द संडे मेल

देहरादून।उत्तराखंड में शिक्षा और स्कूलों को लेकर आए दिन तमाम किस्से सामने आते रहते हैं।स्कूलों की बदहाली और बच्चों से काम कराने के वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होते रहते हैं।पिछले दिनों चमोली जिले के धराली का एक किस्सा सामने आया था इन दिनों देहरादून के बंजारावाला का वीडियो चर्चाओं में है।पहाड़ों की शिक्षा की स्थिति क्या है पिछले साल एक स्कूल के रिजल्ट से उजागर हुई थी। एक कक्षा में अकेला बच्चा था वही बोर्ड की परीक्षा में फेल हो गया।उत्तराखंड की बदहाली के लिए देखा जाए तो सरकारें जिम्मेदार हैं।क्योंकि राज्य बनने के बाद पहाड़ का जो विकास और सुधार होना चाहिए था वो किसी सरकार ने नहीं किया।मूलभूत सुविधाएं भी राजमार्गो के आसपास सिमट कर रह गई।पहाड़ धीरे धीरे खाली होने लगे।सरकार ने पलायन रोकने के लिए कुछ नहीं किया। पलायन रोकने के लिए बनाया विभाग ही पौड़ी से देहरादून पलायन कर गया।देहरादून और उसके आसपास के इलाके को  उत्तराखंड समझ अंधाधुंध निर्माण होने लगा।इसके चलते भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया।

पहाड़ की पीड़ा यह है कि अध्यापक मैदानी क्षेत्र में ही नौकरी करना चाहते हैं।पहाड़ में मजबूरी में कोई जाता है।पहाड़ में जिसकी पोस्टिंग होती है वह पहले दिन से ही मैदान में वापसी की कोशिश में लग जाता है।इसके लिए अध्यापक से ज्यादा सरकारें दोषी हैं।क्योंकि पहाड़ में कोई सुविधा होती नहीं है।न सड़कें,न अस्पताल हैं और ना ही बच्चों की शिक्षा के लिए अच्छे शैक्षणिक संस्थान है।जो अध्यापक पहाड़ों में नौकरी करते हैं।उन पर कोई निगरानी होती नहीं है।इसलिए मौका पड़ने पर कुछ अध्यापक बच्चों से अपना घरेलू काम भी करवा लेते हैं।जैसे की पिछले दिनों  चमोली ज़िले के थराली ब्लॉक के गोठिंडा गाँव का एक वायरल वीडियो सामने आया था।इसमें एक शिक्षक बच्चों से अपनी कार धुलवा रहा था।अब देहरादून के बंजारावाला स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय का एक और  वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई करने की बजाय मजदूरों की तरह रेत बजरी ढोने का काम करते देखे जा सकते हैं। सरकारी स्कूलों की यह ऐसी कड़वी सच्चाई है जो शिक्षा की बदहाली उजागर करती है।सरकारों को सब पता होता है।लेकिन जब सरकारें भ्रष्टाचार में लिप्त हों तो अध्यापकों में डर खत्म हो जाता है।

  उत्तराखंड का दुर्भाग्य यह है कि किसी भी सरकार ने पहाड़ का दर्द नहीं समझा।पुष्कर सिंह धामी को जब बीजेपी आलाकमान ने मुख्यमंत्री बनाया था तो उनसे बड़ी उम्मीदें थी।क्योंकि वह एक मध्यमवर्गी परिवार से आते थे।लेकिन वह भी उसी रास्ते पर चल पड़े जिसके लिए उत्तराखंड जाना जाता है।उत्तराखंड के विकास के नाम पर पहाड़ का केवल दोहन ही हुआ है।जिसमें जमकर भ्रष्टाचार हुआ।इसलिए मुख्यमंत्री धामी भी भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में आ गए।इसके चलते पहाड़ की पूरी व्यवस्था ही गड़बड़ा गई है।उसमें शिक्षा भी शामिल है।

The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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