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देश के पत्रकारों में धामी सरकार के खिलाफ बढ़ता रोष

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घोटाला उठाने वाले पत्रकार को नोटिस देने का मामला

द संडे मेल

नई दिल्ली।उत्तराखंड में पत्रकारों के खिलाफ बढ़ते मामलों को लेकर धामी सरकार की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है।हाल में उत्तरकाशी में एक पत्रकार की संदिग्ध मौत और उसके बाद  भ्रष्टाचार का मामला उजागर करने वाले पत्रकार पर कानूनी शिकंजा कसने की कोशिशों से मीडिया में  बड़ा गुस्सा है।दिल्ली में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी पत्रकार को नोटिस देने के मामले को गंभीरता से उठा सरकार की निंदा की है।प्रेस एसोशिएसन ने भी निंदा की है।कांग्रेस  धामी सरकार पर लगातार हमलावर बनी हुई है।धामी सरकार लगातार विवादों में घिरती जा रही है। बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले से ही अपनी पार्टी के नेताओं के ही निशाने पर हैं।पत्रकारों के मामले चुनाव साल में सरकार की परेशानी बढ़ा सकते हैं।बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व जितनी जल्दी राज्य में दखल देगा उतना पार्टी हित में रहेगा।क्योंकि सरकार के खिलाफ लगातार जो नकारात्मक माहौल बन रहा है वह चुनाव साल में महंगा पड़ सकता है।

 बढ़ती बेरोजगारी से युवा पहले ही त्रस्त है।बेरोजगार संघ के आंदोलन ने साबित भी किया कि युवा कितने गुस्से में है।आम आदमी बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर पहले ही नाराज है।विकास के नाम पर पहाडवासी फिर ठगा गया है।इस स्थिति में पत्रकारों के बढ़ते मामले चिंता जनक हैं।उत्तरकाशी में राजीव प्रताप सिंह की संदिग्ध मौत रहस्य बनी हुई है।घरवालों का आरोप है कि हत्या हुई ।पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है।

 इस बीच स्वतंत्र पत्रकार अजीत राठी नाम के पत्रकार ने आईटी पार्क की जमीन के घोटाले का मामला उठाया तो सरकार ने नोटिस भिजवा दिया।सरकार ने आईटी पार्क की जमीन को फ्लैट बनाने के लिए एक कंपनी को 90 साल की लीज पर दे दिया।नोटिस से पत्रकार का परिवार दबाव में है।नियम और कायदे से आईटी पार्क की जमीन पर रिहायशी घर नहीं बनाए जा सकते।कांग्रेस का कहना है जिस कंपनी को जमीन दी जा रही है वह पुल निर्माण की गड़बड़ी में दोषी पाई गई थी। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करण माहर ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा हमला बोला है।कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुजाता पॉल का कहना है कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार और घोटालों की बाढ़ आई हुई है।जो मामला राठी ने उठाया है वह सही है।हैरानी की बात यह है कि जिस कंपनी को 90 साल की लीज दी गई है उसके कर्मचारी घटिया पुल  बनाने के दोषी पाए गए थे। पॉल का कहना है कि समझ से परे है कि घटिया कंपनी को ही कैसे लीज दी गई।इसका मतलब सरकार की कंपनी के साथ  कोई सांठ गांठ है। मामला संदिग्ध है इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।पत्रकार को प्रताड़ित करने से भ्रष्टाचार छुपने वाला नहीं है।कांग्रेस जोर शोर से मामले को उठाएगी। सप्ताह 

The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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