चौखुटिया आंदोलनकारियों पहाड़ की स्वास्थ्य
व्यवस्था को सुधारने की मांग को लेकर ही आंदोलन कर रहे हैं।इनकी यही मांग है कि इलाज के अभाव में कोई मरना नहीं चाहिए।वैसे भी पलायन के चलते पहाड़ खाली हो चुके हैं लेकिन जो भी वहां रह रहे हैं कम से कम उनको तो मूलभूत सुविधा दी जानी चाहिए।चौखुटिया के आंदोलनकारियों ने जो बीड़ा उठाया है उसको आमजन का समर्थन मिलने लगा है।कड़कती सर्दी के बीच चौखुटिया आंदोलनकारियों का जोश देखते हुए बनता है। महिलाएं,पुरुष पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की मांग को लेकर चौखुटिया से देहरादून की पैदल यात्रा पर निकले हुए है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर आंदोलनकारी देहरादून की तरफ बढ़ते जा रहे हैं।शनिवार को गैरसैंण से यात्रा फिर शुरू हुई और शनिवार को आदिबद्री तक पहुंची।रविवार को फिर यहां से यात्रा आगे बढ़ेगी।अभी जिन जिन इलाकों से यात्रा निकली वहां पर भीषण सर्दी शुरू हो गई है।लेकिन आंदोलनकारियों का जोश देखते हुए बनता है।हैरानी की बात यह है कि धामी सरकार को आंदोलनकारियों की कोई चिंता नहीं है। जबकि यात्रा में बुजुर्ग भी हैं,महिलाएं भी हैं।चौखुटिया में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग को लेकर इलाके के कुछ लोगों ने तीन हफ्ते पहले धरने और अनशन से आंदोलन की शुरुआत की थी।आंदोलन में जुटी भीड़ ने दिल्ली को धामी सरकार के खिलाफ नाराजगी का सीधा संदेश दे दिया था।धामी सरकार ने आंदोलनकारियों की मांग को गंभीरता से लेने के बजाय उसको मैनेज करने की कोशिश की।लेकिन आंदोलनकारी मैनेज नहीं हुए।बात जब नहीं बनी तो देहरादून तक यात्रा निकाल सरकार के घेराव का फैसला किया गया।
दो दिन पहले यात्रा कुमायूं से निकल जैसे ही गढ़वाल मंडल में पहुंची इलाके के लोग जुड़ने लगे।क्योंकि 25 साल के होने जा रहे उत्तराखंड राज्य के लोग आज भी कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था के शिकार हैं।अस्पताल के नाम पर बजट की बर्बादी है।देहरादून,हरिद्वार और हल्द्वानी को अगर छोड़ दिया जाए तो पूरे पहाड़ में आरंभिक जांच की व्यवस्था नहीं है।हर जगह एक ही व्यवस्था है रेफर कर दो। मरीज को जब इलाज की जरूरत होती उसे मिलता नहीं है और वह दम तोड़ देता है।चौखुटिया जैसी समस्या पहाड़ के अधिकांश गांव और शहरों में है।आंदोलनकारी धन सिंह नेगी कहते हैं कि टिहरी जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं लेकिन सरकार का स्वास्थ्य सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं है।
सरकारों ने भी पहाड़ के बारे कभी सोचा ही नहीं।स्वास्थ्य,शिक्षा,पानी,सड़क के लिए पहाड़ वाले आज भी जूझ रहे हैं।धामी सरकार अपनी छवि चमकाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च बता रही पहाड़ का विकास हो रहा है।चौखुटिया के इस आंदोलन में हर जिले लोग जुड़ने लगे हैं ।देहरादून पहुंचते पहुंचते यह बड़े आंदोलन में बदलता दिख रहा है।चुनाव साल में यह आंदोलन सरकार की परेशानी बढ़ा सकता है।धामी सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित होती जा रही।समाप्त