– प्रेस वार्ता को केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने किया संबोधित
– कहा, जब राष्ट्र सामूहिक शक्ति और संकल्प के साथ आगे बढ़ता है, कोई भी चुनौती मार्ग में बाधा नहीं बन सकती
जोधपुर, 15 जून। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि जो भारत कभी अविश्वास के माहौल से घिरा हुआ था, वह आज आत्मविश्वास और दृढ़ विश्वास से परिपूर्ण राष्ट्र के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के 140 करोड़ नागरिकों ने यह साबित कर दिया है कि जब राष्ट्र सामूहिक शक्ति और संकल्प के साथ आगे बढ़ता है, तो कोई भी चुनौती उसके मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। भारत न तो चुनौतियों के सामने टूटता है और न ही हार मानता है, अपितु हर संकट से और अधिक मजबूत होकर उभरता है। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व की अपेक्षाओं का केंद्र बन चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
सोमवार को सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज पूरा विश्व भारत को एक विश्वसनीय और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखता है। पिछले 12 वर्षों में न केवल देश में रिकॉर्ड निवेश आया है, अपितु इस अवधि में हुए व्यापक बदलावों ने यह भी सिद्ध किया है कि अब कोई भी वैश्विक मंच भारत के हितों की अनदेखी करने का साहस नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि एक समय था जब अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भारत की भूमिका सीमित दिखाई देती थी, लेकिन आज भारत का नेतृत्व वैश्विक विमर्श के केंद्र में है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व मंच पर एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित हुए हैं।
शेखावत ने कहा कि उनकी सरकार ने विकास को केवल एक सरकारी कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा, अपितु उसे राष्ट्रीय मिशन का स्वरूप दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट मानना है कि विकास कोई सीमित अवधि का अभियान नहीं, अपितु 24 घंटे, सातों दिन और वर्ष के 12 महीनों तक चलने वाली सतत प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि विकास सरकार के लिए मात्र राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि देश को नई दिशा देने वाला परिवर्तनकारी एजेंडा है। इसी सोच और प्रतिबद्धता का परिणाम है कि आज भारत अभूतपूर्व गति से प्रगति के पथ पर अग्रसर है और वैश्विक स्तर पर अपनी एक नई पहचान स्थापित कर रहा है।
4 लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण
शेखावत ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में गांवों को जोड़ने के लिए 4 लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया, साथ ही डेढ़ लाख किलोमीटर से ज्यादा नेशल हाइवे बने हैं। उन्होंने कहा कि पहले दिल्ली से देहरादून पहुंचने में 6-7 घंटे लगते थे, लेकिन आज महज सवा दो घंटे में यह सफर तय हो जाता है। इसी तरह देश में कई और एक्सप्रेसवे बने हैं, जिन्होंने यातायात को सुगम बनाया है।
रेलवे का अभूतपूर्व आधुनिकीकरण हुआ
रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर शेखावत ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में हमने रेलवे का अभूतपूर्व आधुनिकीकरण देखा है, रेलवे लाइनों को दोहरीकरण और तिहरीकरण हुआ है। उन्होंने कहा, मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आज देश में 99.5 प्रतिशत रेल का ग्रीन परिचालन बिजली से ही रहा है। उन्होंने कहा कि जब आज दुनिया में ऊर्जा से गुजर रही है, ऐसे में भारत में रेल संचालन का इलेक्ट्रिफिकेशन होना काफी अहम है। शेखावत ने कहा, देश में 150 वंदे भारत ट्रेन ऑपरेशनल हो चुके है, और अमृत भारत ट्रेन शुरू हो चुकी हैं, जिससे ट्रेन परिचालन अत्यंत सुगम हो चुका है। उन्होंने कहा, क्या कोई सोच सकता था कि इस देश में एक साथ 1400 रेलवे स्टेशनों को मोडिफिकेशन होगा। सुदूर जैसलमेर से लेकर फलोदी और जोधपुर तक, पूरे राजस्थान में 85 और देश भर में 1368 रेलवे स्टेशनों को 21वीं शताब्दी के अनुसार बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, आज भारत लंबाई के हिसाब से दुनिया का तीसरा मेट्रो नेटवर्क वाला देश बन गया है। अब हम चीन और अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर आ गए है, जबकि पहले दसवें पायदान पर थे।
डिजिटल भुगतान में भारत कर रहा विश्व का नेतृत्व
शेखावत ने कहा कि आज यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के माध्यम से होने वाले डिजिटल भुगतान में भारत विश्व का नेतृत्व कर रहा है। भारत में यूपीआई के जरिए होने वाले लेन-देन की संख्या अमेरिका और चीन जैसे देशों से भी अधिक है। उन्होंने कहा, जनधन योजना के बाद शुरू हुए डिजिटलीकरण ने न केवल शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया है, अपितु आम नागरिकों का जीवन भी काफी सरल किया है। यूपीआई अब लोगों की दैनिक जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल क्रांति ने करोड़ों लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने का काम किया है। छोटे-छोटे कुटीर उद्योगों और सूक्ष्म उद्यमों को भी राष्ट्रीय ही नहीं, अपितु वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर मिला है।
भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। वैश्विक स्तर पर युद्धों, आर्थिक अनिश्चितताओं और विभिन्न देशों की नीतियों से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक वृद्धि दर दर्ज की है, जिसे पूरी दुनिया ने स्वीकार किया है। कई वैश्विक बाधाओं और प्रतिबंधात्मक परिस्थितियों के बावजूद भारत का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। आज विश्व भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, अपितु समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने वाले देश के रूप में देख रहा है। “मेक इन इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया” और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों ने देश की उत्पादन क्षमता और नवाचार को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि भारत आज लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन का निर्यात करने वाला प्रमुख देश बन चुका है। इसके साथ ही भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनकर उभरा है। विनिर्माण क्षेत्र में हो रही यह प्रगति भारत को वैश्विक उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रही है।
अंतिम व्यक्ति तक लाभ सुनिश्चित किया
शेखावत ने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। आज देश में 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। 58 करोड़ से ज्यादा जनधन खाते खोले गए हैं, जिससे करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। मुद्रा योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता मिली है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। आयुष्मान भारत योजना ने करोड़ों परिवारों को महंगे चिकित्सा खर्चों के बोझ से राहत दी है। 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य कार्ड की व्यवस्था की गई है। इन प्रयासों का ही परिणाम है कि पिछले वर्षों में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकलने में सफल हुए हैं।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्जागरण को समान महत्व
शेखावत ने कहा कि भारत ने विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्जागरण को भी समान महत्व दिया है। लगभग 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर साकार हुआ। काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प किया गया, उज्जैन में महाकाल लोक और केदारनाथ धाम का पुनर्विकास हुआ। राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया गया। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को “पंचतीर्थ” के रूप में विकसित किया गया, जबकि भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिवस को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाने की शुरुआत की गई। औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतीकों को बदलते हुए राजपथ का नाम कर्तव्य पथ रखा गया और सत्ता के केंद्रों को सेवा और जनकल्याण के प्रतीकों के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया। शेखावत ने कहा कि यह केवल सरकार की उपलब्धियों की कहानी नहीं है, अपितु पिछले वर्षों की यह यात्रा 140 करोड़ भारतीयों के विकास, जनभागीदारी, नेतृत्व के अथक परिश्रम और राष्ट्र निर्माण के संकल्प की सामूहिक यात्रा रही है। इसी का परिणाम है कि आज भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है और वैश्विक मंच पर नई ऊर्जा तथा नए विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।






