अंकिता हत्याकांड को लेकर विपक्ष एकजुट
द संडे मेल

देहरादून।अंकिता भंडारी हत्याकांड में आए नए मोड़ के बाद उत्तराखंड में बीजेपी की लगातार मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।मंगलवार को यहां अंकिता हत्याकांड मुद्दे ने विपक्ष को एक जुट कर दिया।विपक्ष ने 4 जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का घेराव करने के साथ पूरे प्रदेश में धरना प्रदर्शन की घोषणा की।विपक्ष परेड ग्राउंड से सीएम आवास तक प्रदर्शन करेगा।आज की बैठक में कांग्रेस,उत्तराखंड क्रांति दल,वामदलों समेत अधिकांश दलों के प्रतिनिधियों ने भाग ले आंदोलन की रणनीति बनाई।अगर विपक्ष की यही एकता चुनाव तक बनी रही तो बीजेपी की हिंदी प्रदेश में पहली बड़ी हार हो सकती है।


अंकिता हत्याकांड मामले में नया ट्विस्ट आने से पहले विपक्ष के निशाने पर केवल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ही थे,लेकिन गंभीर आरोपों के बाद प्रभारी राष्ट्रीय मंत्री दुष्यंत गौतम और प्रदेश महामंत्री संगठन अजय कुमार भी निशाने पर आ गए हैं।दुष्यंत गौतम की सफाई से जनता में गुस्सा और बढ़ता जा रहा है।गौतम पर आरोप लगाने वाली उर्मिला सनावर के रुख में कोई बदलाव नहीं है।वह मुख्यमंत्री धामी और बीजेपी को खुलेआम चुनौती दे सीबीआई से जांच कराने की मांग पर अडिग है।सोशल मीडिया में वह अपने वीडियो जारी कर उत्तराखंड पुलिस से अपनी जान का खतरा बता रही है।इस बीच सोशल मीडिया में इस तरह की भी खबरें चल रही हैं उर्मिला भूमिगत हो गई या पुलिस ने अपने हिरासत में ले लिया है।

फिलहाल उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल आया हुआ है।बीजेपी के नेता गायब हैं।बीजेपी नेताओं का घेराव किया जा रहा है।सांसद अजय भट्ट का भी उनके संसदीय क्षेत्र में घेराव किया गया। बीजेपी नेता डर से बाहर कम ही निकल रहे हैं।हालत यह है कि दिल्ली से लेकर देहरादून तक कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।आरोपित गौतम ही अपना खुद बचाव कर कहने में लगे हैं कि उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।पुलिस केस में अपना काम कर दोषियों को पकड़ चुकी है।दरअसल तीन साल पहले 2022 में जब अंकिता भंडारी का शव रहस्यमय तरीके से नदी में मिला था तभी से तमाम तरह के सवाल उठ रहे थे।पुलिस ने तीन युवकों की गिरफ्तारी कर केस बंद कर दिया था।कोर्ट ने तीनों को उम्र कैद की सजा सुनाई हुई है।लेकिन उसी समय वीआईपी का मामला उछला था जिसे दबा दिया गया।सबूतों वाले कमरे को भी राज्य सरकार ने आनन फानन में गिरा दिया।कांग्रेस ने तभी राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने सबूत नष्ट करने की बात तब भी की थी और अभी भी अडिग है।इसके चलते धामी सरकार की भूमिका पहले दिन से ही संदिग्ध थी।मामला हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गया था। हाई कोर्ट में सीबीआई जांच कराने की याचिक दायर की गई थी लेकिन कोर्ट ने यह कह कर याचिका खारिज कर दी कि एसआईटी की जांच सही दिशा में चल रही है। पीड़िता परिवार की तरफ से 2023 सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई।सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से केस के बारे में पूछा तो धामी सरकार ने अपनी पुलिस की जांच पर संतोष जताया और एसआईटी की जांच को भी सही दिशा में बताया।यही नहीं एक वकील ने वीआईपी की जांच के लिए सीबीआई के गठन की अपील की लेकिन वह भी नहीं मानी गई।इसलिए अब जब उर्मिला ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के नाम का उजागर कर धामी सरकार पर सवाल उठाया तो राजनीति गरमा गई।कांग्रेस और कई महिला संगठन प्रदेश भर में आंदोलन कर रहे हैं। महिलाएं,दरांती के साथ प्रदर्शन कर बीजेपी के खिलाफ हमलावर हैं।मुख्यमंत्री धामी भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर आम जन के निशाने पर पहले से ही थे इस घटना ने और गुस्सा भर दिया है।त्रिपुरा के युवक की हत्या के बाद उत्तराखंड केंद्र बिंदु में आ गया।इस मामले से भी क़ानून व्यवस्था की पोल खुली है।
सभी फोटो सोशल मीडिया से लिए गए हैं।







