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पीएम मोदी उत्तराखंड को फिर चौंकाएंगे

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नड्डा ने आलाकमान को सौंपी रिपोर्ट
द संडे मेल
नई दिल्ली।बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने उत्तराखंड की रिपोर्ट आलाकमान को सौंप दी है।सूत्र बताते हैं आलाकमान उत्तराखंड को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला फैसला कर सकता है।कई तरह की अटकलें है।सूत्र बताते हैं कि नड्डा ने पार्टी की आंतरिक हालातों की जो रिपोर्ट दी है वह चिंताजनक है।नड्डा ने अपने देहरादून दौरे के दौरान धामी सरकार को लेकर जो टिप्पणी की उसके भी कई अर्थ निकाले जा रहे हैं।पार्टी की सरकार है इसलिए कामकाज की सराहना करनी थी लेकिन चुनाव किसके नेतृत्व में होगा उस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।पार्टी आलाकमान को इतना तो अहसास हो गया है कि राज्य के हालात ठीक नहीं है। खुफिया एजेंसियां अपनी रिपोर्ट पहले ही दे चुकी हैं।इस बीच कांग्रेस के सफल राजभवन घेराव ने भी चिंता और बढ़ा दी है।क्योंकि कांग्रेस के प्रदर्शन में जुटी भीड़ प्रायोजित नहीं थी।आमजन में सरकार के खिलाफ गुस्सा देखा गया है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ,उनकी सरकारी और गैर सरकारी टीम कांग्रेस के प्रदर्शन को असफल बताने की मुहिम में जुटी तो है लेकिन दिल्ली पहुंच रही रिपोर्ट सब सच्चाई बता रही है।मीडिया भी मान रहा है कांग्रेस ने पहली बार इच्छा शक्ति दिखा ताकत लगा भीड़ को साथ जोड़ा है।
  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तक भी सभी रिपोर्ट पहुंच चुकी हैं।लेकिन आलाकमान व्यस्तताओं के चलते अभी फैसले नहीं कर रहा है।कई मामले लंबित पड़े है।प्रधानमंत्री मोदी का काम करने का अपना तरीका है।नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के गठन का मामला हो या केंद्रीय मंत्रिमंडल के पुनर्गठन का मामला हो सभी कुछ होना है।जानकारों का मानना है पीएम मोदी अप्रैल में होने वाले पांच राज्यों के चुनाव के दौरान या एक दम बाद चौंकाने वाले फैसलों की शुरुआत कर सकते हैं।नितिन नवीन की टीम में राज्यों के नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों को लाया जा सकता है।एक दो मुख्यमंत्री भी नितिन नवीन की टीम में भेजे जा सकते हैं।उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड और पंजाब के चुनावों को ध्यान में रख फैसले होंगे।उत्तर प्रदेश से एक दो जनों को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है।योगी को चुनाव से पूर्व  मंत्रिमंडल में विस्तार की अनुमति दी जा सकती है।पंजाब में अकालियों से बात बनती है तो उनको भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। जहाँ तक उत्तराखंड का सवाल है तो सीएम धामी ज्यादा संकट में दिखते हैं।नड्डा के दौरे के बाद सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था को लेकर जिस तरह सवाल उठा रहे हैं उससे यही समझा जा रहा है कि आलाकमान भी शायद यही चाहता है।उत्तराखंड अंकिता भंडारी हत्याकांड,लगातार हो रही हत्याएं,भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सुर्खियों में बना हुआ।आलाकमान अपने नेताओं से बयान दिलवा आमजन के गुस्से को बेलेंस करने की कोशिश करता दिख रहा है।जिससे जब भी कोई बड़ा फैसला हो तो आमजन की नाराजगी खत्म हो जाए।इसमें कोई दो राय नहीं है कि उत्तराखंड में बीजेपी दो गुटों में बंट चुकी है।एक गुट  सीएम धामी का है जिसमें उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट,मंत्री सुबोध उनियाल और पूर्व सीएम भगत सिंह कोशियारी हैं बाकी दूसरी तरफ सारे नेता हैं।इन हालातों से धामी भी अवगत हैं।अब फैसला पीएम मोदी को करना है।अप्रैल में पांच राज्यों बंगाल,असम,तामिलनाडु,केरल और पुडुचेरी के चुनाव होने हैं।तो अब यही देखना है कि मामला अप्रैल तक जाता है या बीच में ही उत्तराखंड को लेकर कोई बड़ा राजनीतिक धमाका होता है।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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