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हाई कोर्ट की फटकार ने उत्तराखंड में खनन भ्रष्टाचार की पोल फिर खोली

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शाह के दौरे के हफ्ते भर के भीतर हुआ मामला
द संडे मेल
देहरादून।हाईकोर्ट की विकास नगर मामले लगाई फटकार ने उत्तराखंड में व्याप्त भ्रष्टाचार की तो पोल खोली ही है साथ सरकार और खनन माफिया के बीच चल रही सांठ गांठ को भी उजागर किया है।बीते एक साल में यह पांचवीं फटकार होगी जिसने सरकार को चेताया है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार भ्रष्टाचार को लेकर लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है।पार्टी के नेता भी अपनी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगा चुके है। गैरसैंण में सम्पन्न हुये बजट सत्र में भी भ्रष्टाचार को लेकर धामी सरकार विपक्ष के निशाने पर रही।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हरिद्वार दौरे ने भी सीएम धामी की मुश्किलें बढ़ाई हैं।शाह हरिद्वार जनसभा के  दौरान घटी घटनाओं,भीड़ कम होने और भ्रष्टाचार की शिकायतों से खासे नाराज बताए जाते हैं।माहौल देख शाह ने बीजेपी के 9 साल के शासन की बात की जिससे जनता में व्याप्त गुस्से को कम किया जा सके।शाह के दौरे के एक हफ्ते बाद ही विकास नगर का भ्रष्टाचार का मामला सामने आ गया।

    हाईकोर्ट ने देहरादून के विकासनगर में पिछले दिनों अवैध खनन रोकने गए वन विभाग के एसडीओ राजीव नयन नौटियाल के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर सरकार के खिलाफ कड़ी टिप्पणी कर व्यवस्था की पोल खोल दी।कोर्ट ने कहा कि नौटियाल के खिलाफ रिपोर्ट रात सवा बारह बजे  दर्ज की गई जो कि खनन कारोबारी मनीष चौहान की शिकायत के बाद दर्ज हुई।एक तरह से कोर्ट का कहना था कि  मनीष की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने नौटियाल के खिलाफ मामला दर्ज़ किया।कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए रिपोर्ट दर्ज करने वाले अफसर को निलंबित करने के साथ विकास नगर थाने के पूरे स्टाफ को बदलने के आदेश दिए।यही नहीं विकास नगर के एसएचओ से नौटियाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। दरअसल 27 फरवरी को एसडीओ नौटियाल ने अवैध खनन कर रहे डंपर भरने वालों की फोटो खींचे जिसका वहां मौजूद खनन कर रहे लोगों ने उनके साथ मारपीट की।जिसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी।लेकिन पुलिस ने बाद में खनन कारोबारी चौहान के कहने पर उल्टा नौटियाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर दी।इसके बाद नौटियाल ने कोर्ट की शरण ली।इस पूरे प्रकरण से इतना तो साफ हो गया है कि खनन माफिया की सरकार ओर पुलिस में सीधी घुसपैठ है।इतनी बड़ी तादात में पुलिस वालों पर एक्शन पहले भी लिया गया लेकिन भ्रष्टाचार नहीं रुका। पिछले साल किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के बाद उधमसिंह नगर थाने के दर्जन भर पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।दबाव बढ़ने पर एसएसपी को भी बदलना पड़ा था।सुखवंत ने पुलिस पर जमीन कब्जाने और दबाव बनाने का आरोप लगा आत्महत्या की थी।उधम सिंह नगर में पिछले कुछ समय से जमीन कब्जाने के कई मामले हुए हैं।फसल को उजाड़ कर जमीन कब्जाने के मामले भी सामने आए हैं लेकिन पुलिस प्रशासन केवल तमाशा देखता रहा है।उधम सिंह नगर सीएम धामी का गृह जिला है।
 कोर्ट ने इससे पूर्व पंचायत चुनाव के समय नैनीताल में फैली अराजकता के समय पुलिस के मोन रहने पर सरकार को फटकार लगाई थी।अभी हाल में पिटकुल के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी को हाईकोर्ट के दखल के बाद हटाया गया।जबकि धामी सरकार उनके लिए नियम कानून बदलने में तुली पड़ी थी।उत्तराखंड लोकसेवा आयोग भर्ती मामले भी फटकार लग चुकी है।कई जमीन और खनन से जुड़े कई मामले हैं जिन्होंने सरकार की फजीहत कराई है।भ्रष्टाचार उत्तराखंड चुनाव में बड़ा मुद्दा रहने वाला है।बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व भ्रष्टाचार के मुद्दे का क्या रास्ता निकालता है इस पर सबकी नजर रहने वाली है।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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