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नितिन नबीन के दौरे से पूर्व  विवादास्पद पोस्ट से मचा बवाल

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उत्तराखंड बीजेपी में बढ़ती क्षेत्रवाद की राजनीति पड़ सकती है महंगी
द संडे मेल
देहरादून।भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के उत्तराखंड दौरे से एक दिन पहले पार्टी के कुछ नेताओ द्वारा अपने वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ विवादस्पद  पोस्ट करने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।मामला दिल्ली तक पहुंच गया।पोस्ट को सीधे क्षेत्रवाद की राजनीति को बढ़ावा देने से जोड़ा जा रहा है। इससे पार्टी की परेशानी और बढ़ सकती है। कांग्रेस को बैठे बिठाए सीधे राजनीतिक लाभ मिलता दिख रहा है।इससे पहले पूर्व सीएम भगतसिंह कोशियारी के बयान से भी क्षेत्रवाद की राजनीति को बल मिला था।यह सब तब हो रहा है जब चुनाव सिर पर है और नितिन नबीन पार्टी की कमान संभालने के बाद अपने पहले दौरे पर 28 मई को उत्तराखंड आ रहे हैं।नितिन नबीन का दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब धामी सरकार के सामने कई चुनौतियां है।पार्टी  गुटों में बंटी हुई है।राज्य सरकार के खिलाफ आमजन में भारी नाराजगी है।बीजेपी सरकार के साढ़े 9 साल को लेकर भी धामी सरकार के खिलाफ भारी एंटी इनकनवेंसी बनी हुई है। ऐसे समय पर जब पार्टी नेताओं को एक जुटता दिखानी चाहिए़ थी  कुमायूं के एक नेता अपने वरिष्ठ नेताओं पर सोशल मीडिया के माध्यम से विवादास्पद टिप्पणी कर पार्टी को परेशानी में डाल दिया।यह तब किया जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अनिल बलूनी,पूर्व सीएम सांसद त्रिवेंद्र रावत समेत कई नेता देहरादून में नितिन नबीन की स्वागत की तैयारी में बैठक करने जा रहे थे।इस बैठक में सीएम पुष्कर सिंह धामी को भी शामिल होना है।

  पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के करीबी पूर्व सीएम भगत सिंह कोशियारी ने गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी का नाम लिये बिना जो बयान दिया था उससे क्षेत्रवाद की राजनीति को ही बढ़ावा मिला था।उसी क्रम में कुमायूं पिथौरागढ़ के लाल सिंह कोरंगा ने अपने सोशल मीडिया में पोस्ट कर विवाद खड़ा कर दिया। कोरंगा पार्टी की प्रदेश इकाई की सोशल मीडिया में  सह संयोजक पद पर है। इनकी जिम्मेदारी सरकार की उपलब्धियों का बखान करना और कांग्रेस की तरफ से लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब देना है।लेकिन कोरंगा ने अपने वरिष्ठ नेताओं को ही सीधे निशाने पर ले लिया।हालांकि कुछ देर बाद उन्होंने पोस्ट हटा दी लेकिन तब तक वह वायरल हो चुकी थी।दिल्ली पार्टी मुख्यालय में नेताओं तक पहुंच चुकी थी। ऊपर से डांट पड़ने के बाद संभवतः पोस्ट हटा दी गई।पार्टी के पदाधिकारी कोरंगा ने किसी के नाम के बिना जो विवादास्पद पोस्ट किया उसे सीधे सांसद अनिल बलूनी ओर त्रिवेंद्र रावत  के खिलाफ माना जा रहा है। कोरंगा ने अपने फेसबुक पर लिखा था कि बगावती तेवर दिखाने वाले से मिले कालीचरण ओर शिरखंडी।तीन छाया चित्र बनाए गए थे।नीचे लिखा था लोकप्रिय की छवि खराब करने की हो रही है साजिश।एक प्रकार से पोस्ट को सीएम धामी के पक्ष में पोस्ट की गई लगती थी। कोरंगा सीएम धामी के करीबी माने जाते हैं।
  यह पोस्ट क्यों किया गया उसके पीछे की कहानी इस प्रकार है।गदरपुर शेत्र के विधायक अरविंद पांडे पिछले कुछ समय से धामी सरकार के भ्रष्टाचार और आम आदमियों पर हो रही ज्यादती के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।किसान की आत्महत्या का मामला हो या पत्रकार के उत्पीड़न का पांडे खुल कर राज्य सरकार की खिलाफत की।पांडे की छवि बगावती नेता की मानी जाती है।लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दौरे का कार्यक्रम तय होने के बाद सांसद अनिल बलूनी ओर त्रिवेंद्र रावत पांडे से मिलने उनके घर गए थे।कोशिश यही थी कि अध्यक्ष के दौरे के दौरान पार्टी एक जुट दिखे। लेकिन कोरंगा के पोस्ट से पार्टी सकते में आ गई।कोरंगा ही नहीं ऊधमसिंह नगर जिले के कई और नेता वीडियो जारी कर प्रदेश का माहौल बिगाड़ने में जुटे हैं।निशाने पर बलूनी और रावत को ही रखा जाता है।उधमसिंह नगर जिला धामी का गृह जिला है।नेताओं के बयानों का पूरा लाभ कांग्रेस को मिल रहा है।गणेश गोदियाल की अगुवाई में कांग्रेस बढ़त लिए हुए दिख रही है।कांग्रेस ने अपने सर्वोच्च नेता राहुल गांधी की पहली रैली कुमायूं मंडल के अल्मोड़ा में ही रखी है वहां से वह गढ़वाल जाएंगे।अगले महीने की 4 और 5 जून को राहुल भी उत्तराखंड आ रहे हैं।उत्तराखंड अकेला ऐसा राज्य है जहां पर कांग्रेस की वापसी की पूरी उम्मीद दिख रही है।क्योंकि भ्रष्टाचार और गुटबाजी से बीजेपी कमजोर हुई है।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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