धामी सरकार की चूक से मोदी सरकार भी आई सवालों के घेरे में
अंकिता के माता पिता के धरने से गरमाई राजनीति
द संडे मेल
नई दिल्ली।अंकिता भंडारी हत्याकांड के फिर से तूल पकड़ने का मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस बार मुश्किलें बढ़ा सकता है।क्योंकि राज्य सरकार की लापरवाही के चलते केंद्र की मोदी सरकार निशाने पर आ गई। अंकिता के माता पिता ने जिस तरह दिल्ली पहुंच इंडिया गेट पर धरना दिया उससे मामला ज्यादा गंभीर हो गया है। केंद्र की मोदी सरकार भी सवालों के घेरे में आ गई है।धरने के बाद पुलिस की कार्रवाई से भी अंकिता के माता पिता को सहानुभूति तो मिली ही सोशल मीडिया में भी सरकार को लेकर सवाल उठ रहे है।इस घटना क्रम से सीएम धामी केंद्र के निशाने पर आ गए है।क्योंकि अंकिता के माता पिता अपनी बेटी को न्याय दिलवाने के लिए जब भटक रहे तो धामी सरकार ने कोई कदम क्यों नहीं उठाया।क्यों नहीं धामी सरकार और उनकी लोकल इंटेलिजेसी यह पता नहीं लगा पाई कि अंकिता के माता पिता धरना देने दिल्ली जा रहे है।वह भी तब जब दुष्यंत गौतम को लेकर देहरादून में धरना प्रदर्शन शुरू हो चुका था।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल की अगुवाई में कांग्रेस ने बकायदा धरना दे विरोध किया था।इस घटना के बाद केंद्र की मोदी सरकार को लेकर इसलिए सवाल उठ रहे है कि आखिर आरोपित गौतम को राज्यपाल बनाने की क्या जरूरत थी।भले ही दलित फेस है लेकिन इतने प्रभावशाली नेता नहीं है जो उत्तर प्रदेश में असर डालते।

कहीं ना कहीं पार्टी से गलत फैसला तो हो ही गया है।लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस के सड़कों पर आने के बाद अब अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला ज्यादा गंभीर हो गया है।क्योंकि कांग्रेस अभी तक मुद्दे को ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रही थी,लेकिन राहुल के सक्रिय होने के बाद अब इसके बड़ा चुनावी मुद्दा बनने की संभावना है।धामी सरकार महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार को लेकर पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी उत्तराखंड को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले है।यही देखना होगा कि मोदी जब भी पत्ते खोलेंगे तो क्या उत्तराखंड को कोई बड़ा फैसला करेंगे।







