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दिल्ली के दखल से बात बनी धामी के लिए अभी आगे की राह आसान नहीं

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दिल्ली के दखल से बात बनी

धामी के लिए अभी आगे की राह आसान नहीं

द संडे मेल

देहरादून।उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को नाटकीय अंदाज में युवा आंदोलनकारियों के समक्ष पहुंच सीबीआई की जांच की घोषणा कर फिलहाल हफ्ते भर से चल रहे बेरोजगार संघ के आंदोलन को समाप्त करवा दिया।लेकिन अभी सीएम धामी और उनकी सरकार से संकट टला नहीं है।सूत्र बताते हैं कि केंद्र के दखल ने आंदोलन को समाप्त करवाया।केंद्र ने ही सीएम को निर्देश दिए कि वह स्वयं आंदोलन स्थल में पहुंच सभी मांगे मान मामले को निपटाएं।

पूर्व सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दो दिन पहले जब सीबीआई की जांच की मांग का समर्थन किया था तो तभी संकेत मिलने लगे थे दिल्ली ने दखल दे दिया है।सांसद रावत ने भी बयान दिल्ली के बदलते मूड को भांप ही दिया।आज सीबीआई की घोषणा होते ही सासंद रावत के घर पर जश्न मनाया गया।ये भी उत्तराखंड की बदलती राजनीति के संकेत हैं।

 सूत्र बताते हैं आलाकमान आंदोलन पर बारीकी से नजर रखे हुए था।नेताओं और जनप्रतिनिधियों से रिपोर्ट मांगी गई।साथ ही केंद्र ने अपने स्तर प्रदेश से रिपोर्ट मंगवाई और स्थिति का खुद आंकलन किया।बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी बात पहुंचाई गई।क्योंकि नई जनरेशन के बयानों ने केंद्र की चिंता बढ़ा दी थी।केंद्र सरकार की खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट भी चिंताजनक बताई जा रही थी।इस बीच मीडिया और सोशल मीडिया में बीजेपी के खिलाफ शुरू हुए अभियान ने पार्टी को चिन्ता में डाल दिया था।पहली बार बीजेपी शासित प्रदेश में जनता के गुस्से ने केंद्र को सकते में ला दिया।

नाराज यूकेडी ।उठाए सवाल।

बीजेपी आलाकमान समझ गया था कि अगर आंदोलन उग्र हुआ तो इसका सीधा असर बिहार चुनाव पर पड़ेगा।कांग्रेस के सर्वोच्च नेता राहुल गांधी ने पेपर चोर गद्दी छोड़ नारे को हवा दे मुश्किलें बढ़ा दी थी।कांग्रेस 3 अक्टूबर को सीएम मुख्यालय का घेराव करेगी।कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा।इस बीच उत्तराखंड क्रांति दल ने आंदोलनकारियों पर सवाल उठा नाराजगी जताई है।मतलब चुनाव साल ।में विपक्ष हमलावर बना रहेगा।आंदोलन ने विपक्ष को मुद्दे और ताकत दे दी है।इसलिए बीजेपी आलाकमान ने सभी स्थितियों का आंकलन कर सीएम धामी को सख्त निर्देश दिए कि अब वह खुद आंदोलनकारियों से बात कर आंदोलन समाप्त करवाएं।जिससे प्रदेश के गुस्से को शांत किया जाए। इसलिए कल तक जिन आंदोलनकारियों के बारे में जेहादी,प्रायोजित,न जाने क्या क्या कहा गया आज सीएम धामी को खुद उनके पास जा कर सीबीआई जांच की माँग स्वीकारने की घोषणा करनी पड़ी।

 सूत्र बताते हैं कि बिहार चुनाव तक आलाकमान कोई एक्शन नहीं लेगा,लेकिन उसके बाद पहला बड़ा आपरेशन उत्तराखंड को लेकर ही होगा।उत्तराखंड में सवा साल बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं।प्रदेशभर में फैले बेरोजगार संघ के आंदोलन ने इतने तो संकेत दे दिए हैं कि राज्य की जनता धामी सरकार के खिलाफ।मामला केवल पेपर लीक नहीं है,भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा बन गया है।पहली बार किसी बीजेपी के सीएम पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप और नाराजगी सामने आई है।

।राज्य गठन के बाद यह पहला आंदोलन था जिसमें बच्चे,नौजवान,बुजुर्ग और बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों में उतरी और गुस्से में उन्होंने सीधे सीएम  और बीजेपी के नेतृत्व को चुनौती दी।जानकार मानते हैं कि सीएम धामी ने जिस तरह आंदोलन को लेकर बयानबाजी की उससे आमजन में गुस्सा भरा।सरकार आंदोलन को ठीक से हैंडल नहीं कर पाई जिससे स्थिति बिगड़ने के आसार पैदा हुए।आंदोलन की अगुवाई करने वाले नेता सीबीआई की मांग से संतुष्ट जरूर नजर आए,लेकिन प्रदेश की जनता की नाराजगी अब कम नहीं होने वाली है।केंद्र भी इस बात को समझता है।इसलिए प्रदेश में बड़े बदलाव की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है।सीएम धामी की बॉडी लेंग्वेज और भाषा भी बता रही थी कि ऊपर से जो सीमित बोलने को कहा गया वही उन्होंने बोला।समाप्त

The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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