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राहुल और खड़गे की मंशा के अनुरूप चुने जाने चाहिए जिलाध्यक्ष

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कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान
गहलोत की नेताओं को सिफारिश से बचने की सलाह
द संडे मेल

नई दिल्ली।राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संगठन सृजन अभियान की जोरदार वकालत करते हुए कहा है कि जब बिना सिफारिश के निष्पक्ष जिलाध्यक्ष चुने जाएंगे तो पार्टी को ताकत मिलेगी।कोशिश यही होनी चाहिए कि कोई भी नेता किसी की कोई सिफारिश न करे।साथ ही चुने जाने वाले जिलाध्यक्षों का सबको स्वागत कर उनको साथ लेकर चलना चाहिए।राजस्थान में चलाए गए संगठन सृजन अभियान के बाद जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर शुक्रवार को दिल्ली में पार्टी की अहम बैठक थी।इस बैठक में संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल,राज्य में लगाए पर्यवेक्षक,प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा,विधायक दल नेता टीकाराम जूली जैसे कई नेता शामिल हुए।पूर्व सीएम गहलोत को भी बैठक में बुलाया गया था।लेकिन बिहार चुनाव के व्यस्त दौरे के बाद वह सीधे जयपुर चले गए।

 जयपुर से गहलोत ने सीधा संदेश दे दिया कि राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष खड़गे की भावनाओं के अनुरूप निष्पक्ष तरीके से जिलाध्यक्षों का चयन होना चाहिए जिससे संगठन और ताकतवर बन सके।गहलोत का यह संदेश ऐसे समय पर आया जब खबरें आ रही थी  वरिष्ठ नेता संबंधों और ताकत का इस्तेमाल कर पर्यवेक्षकों पर दबाव डाल रहे हैं।यह बात आलाकमान तक भी पहुंची है।
  गहलोत ने कहा कि संगठन सृजन अभियान महत्वपूर्ण कार्यक्रम है।उदयपुर संकल्प शिविर में लिए गए संकल्पों में से एक है।उनके नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष खड़गे चाहते हैं कि राज्य के 50 जिलों में 50 वर्ष से कम उम्र के कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाना चाहिए।इस अभियान के लिए पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं को चुना है।पर्यवेक्षकों में कई केंद्र में मंत्री रह चुके है।प्रदेश अध्यक्ष और विभिन्न पदों में रह चुके हैं। ऐसे पर्यवेक्षकों पर दबाव डालना,फोन कर भावना बताना उचित नहीं है।हाईकमान की एक ही मंशा है कि निष्पक्ष फीड बैक आए जिससे सही व्यक्ति का चयन हो सके।पहले दिन से मेरा यही स्टैंड है कि निष्पक्ष और ईमानदारी से जिला अध्यक्ष बनेंगे तो पार्टी को मजबूती मिलेगी।ईमानदारी से प्रोजेक्ट पूरा होना चाहिए।दिल्ली में आलाकमान तय करेगा कि कब लिस्ट जारी करते हैं।लेकिन हाईकमान के फैसले का सब को स्वागत करना चाहिए।जिलाध्यक्ष के चयन का फैसला बहुत आसान नहीं होता है। सरकार में मंत्री बनाना आसान है,लेकिन जिलाध्यक्ष का चयन बड़ी चुनौती होता है।जो भी जिलाध्यक्ष बने उसका सभी को स्वागत करना चाहिए।पूरा सहयोग देना चाहिए।गहलोत का यह संदेश कई मायनों में अहम माना जा रहा है।उनके इस संदेश से जिलाध्यक्षों के चयन की निष्पक्ष प्रक्रिया को ताकत मिलेगी।समझा जा रहा है कि आलाकमान जल्दी ही राजस्थान,पंजाब,उत्तराखंड जैसे राज्यों के जिलाध्यक्षों की सूची जारी कर सकता है।समाप्त
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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