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चौखुटिया आंदोलनकारी 4 को करेंगे सीएम का घेराव

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चौखुटिया आंदोलनकारी 4 को करेंगे सीएम का घेराव
धामी सरकार की बढ़ेगी चुनौतियां
द संडे मेल
देहरादून।अल्मोड़ा जिले का चौखुटिया आंदोलन पुष्कर सिंह धामी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।उत्तराखंड की बिगड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर  शुरू हुआ यह छोटा आंदोलन अब प्रदेश स्तर का बन चुका है।इसमें स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ अब राजधानी का मुद्दा भी जुड़ गया।आंदोलनकारी  देहरादून को नकली राजधानी घोषित कर गैरसैण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग करने लगे हैं।उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को राजधानी के मुद्दे पर आंदोलनकारियों का गुस्सा तक झेलना पड़ा।कांग्रेस नेता हरीश रावत इन दिनों पहाड़ी इलाकों के भ्रमण में निकलें।इसी क्रम में वह अनशन में बैठे चौखुटिया आंदोलनकारियों के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंचे। वहां मौजूद महिला आंदोलनकारियों ने गैरसैण राजधानी बनाए जाने के मामले में पूर्व सीएम से सवाल जवाब कर डाले।आंदोलनकारियों का यही कहना था कि उन्होंने स्थाई राजधानी गैरसैंण क्यों बनाई।रावत ने समझाने की कोशिश की लेकिन मामला गर्म होता देख वहां से चल दिए।
  चौखुटिया में अनशन और धरने पर में बैठे आंदोलनकारियों को एक माह होने वाला है।सरकार की तरफ से जब मांग नहीं मानी गई तो।आंदोलनकारियों का एक जत्था पैदल देहरादून की यात्रा पर निकल पड़ा। यात्रा का नाम आपरेशन स्वास्थ्य दिया गया है।इसमें महिला पुरुष सभी शामिल हैं।भुवन कटेत की अगुवाई में निकाली जा रही इस पद यात्रा को हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है।आंदोलनकारी भुवन के अनुसार यात्रा 4 नवंबर को देहरादून पहुंच मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगी।उन्होंने प्रदेश भर से आमजन से वहां पहुंचने की अपील की है।इस आंदोलन से पौड़ी,उत्तरकाशी टिहरी जैसे जिलों के कई इलाकों में अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की बिगड़ी हालत का मुद्दा गर्म हो गया है।टिहरी जिले के पिलखी गांव का मामला भी तूल पकड़ चुका है।पिलखी में प्रसव के बाद 22 वर्षीय रवीना की जान इलाज के अभाव में चली गई।उत्तराखंड के अधिकांश जिलों के स्वास्थ्य केंद्रों की हालत चिन्ता जनक है।पहाड़ मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है।यही वजह है कि पहाड़वासी अब राजधानी पहाड़ में बसाने की मांग कर रहा है।गैरसैण में राजधानी बसाने के नाम पर करोड़ों खर्चा हो चुका।हाईकोर्ट भी गैरसैण को लेकर टिप्पणी कर चुका है।चौखुटिया आंदोलनकारियों ने अपनी मांग से गैरसैण की मांग जोड़ पहाड़वासियों की उम्मीदें जगा दी हैं।धामी सरकार पहाड़ के बिगड़े हालातों पर ध्यान देने के बजाय अपनी छवि चमकाने में व्यस्त है।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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