उत्तराखंड,राजस्थान और मध्यप्रदेश में उथल पुथल के आसार
द संडे मेल
नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर चौंकाने वाले फैसले कर सकते हैं।सूत्रों की माने तो प्रधानमंत्री मोदी अपनी टीम में बड़ा बदलाव के साथ कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अभी से बदल फिर चौंका सकते हैं।बस इतना भर देखना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी चौंकाने वाले फैसले इस साल में करते हैं या अगले साल में। वैसे भी ये साल खत्म होने वाला है और नया लगने वाला है।लेकिन ऊपरी तौर पर मंथन शुरू हो गया है।सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक दो अफसरों को हटा संकेत दे दिए हैं कि भी भ्रष्टाचार सहन नहीं करेंगे।मुख्यमंत्रियों को लेकर भी हर तरह की रिपोर्ट मांगी गई।सूत्रों का कहना है कि बीजेपी शासित अधिकाशं राज्यों के मुख्यमंत्रियों के कामकाज को लेकर आईबी ने जो रिपोर्ट दिल्ली को दी है वह बहुत उत्साहजनक नहीं है ।उत्तर प्रदेश और असम को लेकर तो कोई चिंता नहीं है।बाकी राज्यों में चिंताजनक स्थिति हैं।

खास तौर पर नए और कम अनुभव वाले चेहरों पर खेला गया दांव बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है।प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले 2021 में कम अनुभव वाले पुष्कर सिंह धामी पर दांव खेला था।एक साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में धामी खुद चुनाव हार गए थे।मोदी और योगी की वजह से पार्टी ने बहुमत पाया।हार के बाद भी पीएम मोदी ने धामी को सीएम बना दिया।उसी दिन से पार्टी के अंदर बड़ा धड़ा नाराज हो गया था।धामी पर पीएम ने भरोसा तो किया लेकिन वह मौके का फायदा नहीं उठा पाए।उसका नतीजा यह हुआ कि आज के दिन उत्तराखंड के हालात बहुत चिंताजनक बने हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि सबसे ज्यादा खराब रिपोर्ट उत्तराखंड की है।मतलब आज चुनाव हो जाएं तो कांग्रेस आसानी से चुनाव जीत जाएगी।
उत्तराखंड से सबक ले आलाकमान ने अभी से दूसरे बीजेपी शासित दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के कामकाज की रिपोर्ट मंगवाई।

सूत्र बताते हैं राजस्थान,मध्यप्रदेश और उड़ीसा की रिपोर्ट भी अच्छी नहीं है।हरियाणा और छत्तीसगढ़ वाले बहुत प्रभाव अभी तक नहीं छोड़ पाए हैं।राजस्थान,मध्यप्रदेश,हरिया णा और उड़ीसा में आज चुनाव हो जाएं तो बीजेपी की वापसी बहुत आसान नहीं होगी।इन राज्यों के कार्यकर्ता तो निराश हैं ही नेता भी आशंकित हैं।हालांकि इन राज्यों के मुख्यमंत्री दिल्ली के बराबर चक्कर लगा आलाकमान को खुश करने की बराबर कोशिश में लगे हैं।लेकिन उसका कोई फायदा होता दिख नहीं रहा है।मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव के तो दिल्ली में घर लेने की बात भी सामने आई है।

आलाकमान इन राज्यों की निराशाजनक रिपोर्टों से चिंतित है।इन हालात में प्रधानमंत्री मोदी चौंकाने वाले बदलाव कर सकते हैं।कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मंत्रिमंडल में भी बड़े बदलाव किये जा सकते है।उत्तराखंड,राजस्थान,छत्ती सगढ़ और मध्यप्रदेश में बीजेपी का सीधा कांग्रेस से मुकाबला है।राजस्थान में कांग्रेस भजनलाल सरकार पर पूरी तरह हावी है।पूर्व सीएम अशोक गहलोत आज भी मौजूदा सीएम से भी ज्यादा लोकप्रिय हैं।मध्यप्रदेश में कांग्रेस ठीक ठाक स्थिति में है।पूर्व सीएम कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पूरी तरह सक्रिय हैं।मौजूदा टीम सड़को पर हो हल्ला करती दिखती है।सीएम मोहन यादव अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को साध नहीं पा रहे हैं।नेताओं की सुनवाई नहीं हो रही है।केंद्रीय मंत्रियों तक के भी कोई काम नहीं हो रहे हैं।मोहन यादव भी उत्तराखंड के सीएम धामी की तरह केवल और केवल संघ के एजेंडे पर फोकस किए हुए हैं।उत्तराखंड में धामी संघ के एजेंडे को आगे बढ़ाने और ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा दे अपने को चर्चा में बनाए रखे हुए।राज्य की मूलभूत सुविधाओं की तरफ उनका कोई ध्यान नहीं रहा।जिससे प्रदेश की जनता सड़कों पर है।पार्टी के नेता ही धामी पर सवाल उठा चुके हैं।कांग्रेस ने चुनावी साल में ठीक ठाक टीम का चयन कर बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पास सभी राज्यों की रिपोर्ट है।उत्तराखंड में जनवरी से चुनाव साल लग जाएगा।बदलाव के लिए पहली प्राथमिकता उत्तराखंड ही होगी।सूत्र बताते हैं आलाकमान किसी गैर विधायक को उत्तराखंड की कमान सौंप सकता है।जिससे राज्य की नाराजगी को शांत किया जा सके लेकिन एक दिक्कत आ रही है।अगर अभी किसी को कमान सौंपी तो 6 माह के अंदर चुनाव लड़ना होगा।दो मत चल रहे हैं।चुनाव से कुछ महीने पहले बदलाव कर चुनाव में जाया जाए।अब यह देखना होगा कि बीजेपी आलाकमान पहले दूसरे राज्यों में बदलाव करता है या शुरुआत उत्तराखंड से करता है। नया साल बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की दिल की धड़कन बढ़ाएगा। समाप्त







