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होली बाद उत्तराखंड को मिल सकता है नया प्रभारी

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मार्च दूसरे हफ्ते में नितिन की टीम के गठन के आसार
द संडे मेल
नई दिल्ली।यहां राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा है कि होली बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपनी नई टीम का गठन कर सकते हैं।सूत्रों का कहना है कि बड़ी संख्या में कई मौजूदा पदाधिकारियों की छुट्टी तय है।इनमें उत्तराखंड के प्रभारी दुष्यंत गौतम की भी छुट्टी होगी।अंकिता भंडारी हत्याकांड के तूल पकड़ने के बाद से गौतम को उत्तराखंड से दूर रखा गया है।अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए गुरुवार को भी सामाजिक संगठनों ने मोन मार्च निकाला। कांग्रेस इस मार्च में नजर नहीं आई।
अंकिता भंडारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी वीआईपी को लेकर गुस्सा आज भी बरकरार है।सब की यही मांग है वीआईपी को सामने लाया जाए।इस बीच दुष्यंत गौतम के सोशल मीडिया में उनके विदेश में घूमने के फोटो वायरल हो रहे हैं। गौतम की जगह किसे दी जाएगी इस पर सबकी नजर होगी।क्योंकि मौजूदा समय में वह ही सबसे विवादास्पद प्रभारी रहे हैं।प्रभारी के साथ राज्य में कई बदलाव होंगे।पार्टी 11 माह बाद होने वाले चुनावों के मद्दे नजर कई अहम फैसले कर सकती है।उत्तराखंड में अगले साल इन्हीं दिनों विधानसभा के चुनाव हो जाएंगे।उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश और पंजाब के भी चुनाव होने हैं।उत्तर प्रदेश में तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में चुनाव होगा जबकि उत्तराखंड और पंजाब को लेकर अभी कुछ तय नहीं है।पंजाब में बीजेपी  अकाली दल के साथ गठबंधन कर सकती है।उत्तराखंड में बीजेपी की परेशानी दूसरी है।
  उत्तराखंड में बीजेपी दस साल से सत्ता में है।इन दस साल में बीजेपी ने चार बार अपने मुख्यमंत्री बदले हैं।पुष्कर सिंह धामी बीजेपी के पहले ऐसे नेता हैं जो लगातार साढ़े चार साल से सीएम पद पर हैं।इससे पूर्व किसी भी नेता को इतने लंबे समय तक सीएम बने रहने का मौका नहीं मिला।पार्टी ने राज्य में चुनाव जीतने के लिए कई प्रयोग किए।गुटबाजी के चलते सीएम बदलती रही है।धामी के कार्यकाल में भी गुटबाजी अपने चरम पर है।पहली बार उत्तराखंड में बीजेपी शासन के खिलाफ नाराजगी पनपी है।आलाकमान को भी आभास है कि राज्य में नाराजगी है।कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर बीजेपी के नेता ही खुद सवाल उठा रहे हैं।अभी हाल में पिटकुल के एमडी प्रकाश चंद ध्यानी का मामले ने तो ज्यादा तूल पकड़ लिया है।हाई कोर्ट की तरफ से उनकी तकनीकी योग्यता पर सवाल उठा उन्हें हटाने के निर्देश दिए गए थे,लेकिन सरकार ने नियमों में परिवर्तन कर उन्हें बनाए रखने की कोशिश जारी है।सीएम धामी ने कैबिनेट की बैठक कर नियम बदल दिए। गौर करने वाली बात यह है कि कांग्रेस खुल कर ध्यानी की खिलाफत नहीं कर रही है।कांग्रेस भी मुद्दों से भटकती दिख रही है। जब अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए सामाजिक संगठन मार्च निकाल रहे थे उसी समय प्रदेश कांग्रेस होली मिलन समारोह मना रही थी।कोटद्वार के दीपक कुमार की राहुल से हुई मुलाकात ने बीजेपी को ध्रुवीकरण की राजनीति का बड़ा मौका दे दिया।सीएम धामी ने लगे हाथ मुद्दे को भुनाना शुरू कर दिया।बीजेपी का कहना है दीपक ने नाम के आगे मोहम्मद लगाया इसलिए राहुल उनसे मिले।धामी भी जानते हैं कि कुर्सी बचाए रखने के लिए ध्रुवीकरण की राजनीति को आगे बढ़ाना होगा जिससे आलाकमान बदलाव के बारे में न सोचे।अब देखना होगा कि होली बाद बीजेपी की नई टीम बनती है तो किस राज्य में क्या बड़े बदलाव होते हैं।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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