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धामी ने केजरीवाल को पिछाड़ा

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मार्केटिंग में पंजाब को सीधी टक्कर,करोड़ों खर्च

जबकि दोनों की आर्थिक हालत खस्ता

द संडे मेल

देहरादून।उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी और सरकार की मार्केटिंग के मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बहुत पीछे छोड़ दिया है।यही नहीं बड़े राज्यों को भी पिछाड़ा दिया है।धामी सरकार बीते पांच साल में एक हजार करोड़ से ज्यादा का खर्चा अब तक कर चुकी है।जानकार मानते हैं कि अगर बीजेपी आलाकमान ने धामी को ही सीएम बनाए रखा तो एक साल में खर्चा कई गुना और बढ़ जाएगा।चुनाव साल में यूं भी सरकारें ज्यादा खर्चा करती हैं।आर्थिक रूप से पिछड़े राज्य के लिए छवि चमकाने पर खर्च की जाने वाली धन राशि बहुत ज्यादा है।सक्षम और बड़े राज्य राजस्थान,मध्यप्रदेश,आंध्रप्रदेश ,गुजरात जैसे राज्यों की सरकारें भी अपनी छवि चमकाने पर इतना खर्चा नहीं करती है।मीडिया को मैनेज करने के लिए विज्ञापन पर अधिक धन राशि खर्च करने की परंपरा आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली का मुख्यमंत्री बनते ही शुरू की थी।शीला दीक्षित के समय जो बजट होता था उसे कई गुना कर दिया गया।बीजेपी और तमाम विपक्षी पार्टियों ने आम आदमी पार्टी पर पैसे की बर्बादी के आरोप भी लगाए थे।बीजेपी ने चुनाव में मुद्दा भी बनाया था। यहां तक आरोप थे कि नेगेटिव खबर दिखाने या लिखने पर मीडिया हाउस को बुला कर चेताया जाता था। आम आदमी पार्टी दिल्ली में तो चुनाव हार गई लेकिन पंजाब में अभी सत्ता में है। वहां पर भी आप सरकार ने दिल्ली वाला अपना फार्मूला अपना  विज्ञापनों पर बेहिसाब पैसा खर्च कर रही है।मुख्यमंत्री भगवत मान तो सेकेंड भर में हर चैनल में दिखाई देते हैं।राष्ट्रीय चैनलों में तो एक समय पर एक साथ पंजाब सरकार के एक जैसे विज्ञापन दिखाए जाते हैं।इन पर करोड़ों खर्च होता है।जबकि पंजाब सरकार खुद ही राज्य के खस्ता हालत को लेकर केंद्र से मदद मांग रही है।आज के दिन पंजाब के सीएम मान और उत्तराखंड के सीएम धामी में ही मार्केटिंग पर खर्च करने की होड़ सी मची दिखती है,जबकि दोनों राज्यों की आर्थिक हालत खस्ता है।दोनों सरकारें जनता का पैसा लुटा मजा ले रही है।क्योंकि किसी भी मुख्यमंत्री को अपनी जेब से पैसा नहीं देना पड़ता है।पंजाब सरकार अपनी योजनाओं को दिखाती है तो उत्तराखंड सरकार के विज्ञापनों में अधिकांश केंद्र की योजनाएं ही होती है।उत्तराखंड में बीते पांच साल राज्यस्तर पर ऐसा कोई नया काम नहीं हुआ जिसका सरकार श्रेय ले सके।एक नया जिला,एक नया सरकारी अस्पताल,मेडिकल कॉलेज,इंजीनियरिंग कॉलेज या ऐसा कुछ नया नहीं हुआ जिससे पहाड़ वालों को रति भर भी लाभ हो पाता।विज्ञापनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोटो पर जोर और केंद्र की योजनाओं का अधिकांश प्रचार होता दिखाया जाता है।सीएम धामी ने संघ के करीब जाने के लिए जरूर ऐसे फैसले किए जिनसे वह उनकी नजरों में आ सकें।नाम बदलने से लेकर दूसरे समुदाय को टारगेट कर असल मुद्दों से ध्यान भटकाने में सफल रहे हैं।हाल में मसूरी का करोड़ों रुपए का जमीन घोटाला भी बेरोजगार युवाओं के आंदोलन में गायब हो गया।कांग्रेस ने भी घोटाले पर बोलना बंद कर दिया।जबकि दूसरे कई और घोटाले उठाने की कांग्रेस ने घोषणा की थी।मसूरी घोटाले में योग गुरु बालकृष्ण की कंपनी का नाम सामने आया था।

  आमजन में सवाल  तो  है कि मसूरी घोटाला सामने आने के समय ही बेरोजगार आंदोलन क्यों हुआ। हालांकि यह आंदोलन  धामी सरकार के खिलाफ व्याप्त भ्रष्टाचार  के गुस्से को खुल कर सामने लाने में सफल रहा।धामी सरकार भले ही अब बचाव में कुछ भी कहे लेकिन केंद्रीय नेतृत्व भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर चिन्तित और गुस्से में है।क्योंकि नया साल लगते ही चुनाव वर्ष शुरू हो जाएगा।सोशल मीडिया और दूसरे मीडिया में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा बन चुका है।भ्रष्टाचार मार्केटिंग में भी जमकर हुआ है।दूरदर्शन से लेकर छोटे मोटे चैनलों से लेकर बड़े बड़े चैनलों को करोड़ों रुपए दे दिए गए। प्रिंट मीडिया में भी कमोवेश यही स्थिति है।कायदे कानून ताक में रख उत्तराखंड के विकास का ऐसा प्रचार किया जा रहा है कि जैसे खुशहाल राज्य बन गया हो।भ्रष्टाचार को दबाने के लिए राजनीति भी निचले स्तर की हो रही है।सब को साथ लेकर चलने के बजाए इलाके को महत्व दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का सबका साथ सब का विकास वाला नारा उत्तराखंड में कमजोर हुआ है।समाप्त

The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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