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धामी को भेदभाव की राजनीति अब पड़ेगी महंगी 

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अंकिता हत्याकांड के नए खुलासों से उत्तराखंड गुस्से में
द संडे मेल
देहरादून।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेदभाव की राजनीति भारी पड़ सकती है।कांग्रेस  अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पूरे गढ़वाल मंडल में आंदोलन की तैयारी में है।अभी तक जो भेदभाव हुए कांग्रेस उन्हें भी मुद्दा बनाने जा रही है।पूरे गढ़वाल मंडल में 41 विधानसभा सीटे आती है जबकि धामी के इलाके कुमायूं में कुल 29 सीटें हैं।कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट है कि गढ़वाल पर ताकत लगाओ और कुमायूं पर लोकल नेता अपने हिसाब से रणनीति बनाएंगे।आज के हालात में सीएम धामी और उनकी सरकार के खिलाफ गढ़वाल और कुमायूं दोनों जगह भारी नाराजगी है।बेरोजगारी,भ्रष्टाचार और मूलभूत समस्याओं को लेकर पहाड़ में बीजेपी के खिलाफ भारी आक्रोश है।धामी सरकार ने पहाड़ से ज्यादा दिल्ली,एनसीआर और मुजफ्फरनगर के लोगों को प्राथमिकता दे कर काम किए।पहाड़ियों की घोर उपेक्षा हुई है। क्षेत्रवाद का सबसे बड़ा उदाहरण खेल में देखने को मिला था। राष्ट्रीय स्तर के अधिकांश खेल देहरादून या कुमायूं में करवाए गए।एशिया के दूसरे सबसे ऊंचे  पौड़ी के रांसी स्टेडियम में केवल तैयारियां कराई गई खेल का कोई आयोजन नहीं हुआ।

सौजन्य कांग्रेस सोशल मीडिया से

 

कांग्रेस अब इस मुद्दे पर जमकर भुना रही है।कांग्रेस यही संदेश दे रही है कि सीएम धामी ने जानबूझकर गढ़वाल की उपेक्षा की।कांग्रेस वीडियो बना सोशल मीडिया में बीजेपी पर हमलावर बनी हुई है।गढ़वाल के लोगों में भी उपेक्षा को लेकर नाराजगी।कई ऐसे मामले हैं जिन्होंने क्षेत्रवाद को हवा दी।

बीजेपी के भीतर ही गढ़वाल मंडल के नेताओं की उपेक्षा कर दी गई। मंत्री टारगेट किए गए।सांसद उपेक्षा से नाराज हैं।बीजेपी आलाकमान तक रिपोर्ट भेजी हैं। अभी तक अनदेखी की जा रही है।लेकिन अंकिता भंडारी हत्याकांड से बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व भी सकते में आ गया।दिल्ली में यही चर्चा है कि सीएम धामी ने केंद्र को सच नहीं बताया।जिन वीआईपी की चर्चा अंकिता हत्याकांड में हो रही है उनको लेकर दूसरी तमाम बातें भी चर्चा में आने लगी है।उत्तराखंड जमीन  और होटल रिसॉर्ट के लिए जाना जाता है।मसूरी तो वैसे भी आए दिन चर्चा में रहता है।रामदेव के करीबी बालाकृष्णन को घोटाला कर अरबों की जमीन सस्ते में दे दी गई।दिल्ली के बड़े मीडिया हाउस ने उसे उजागर भी किया। पहाड़ में तमाम आंदोलन हो रहे है लेकिन धामी सरकार एक दम निश्चिंत दिखाई देती ।जैसे केंद्र का कोई डर ही न हो।

अंकिता का यह फोटो सोशल मीडिया से लिया गया है।

लेकिन अंकिता हत्याकांड में अब जो बातें सामने आ रही है उससे साफ लग रहा है कि आलाकमान को प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने ही सच जानने नहीं दिया।कायदे से प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को पहाड़ का सच केंद्र को बताना चाहिए था।अब यही चर्चा है कि गौतम ने अहसानों के बोझ तले दबे होने के कारण  सच को दबाया और पार्टी की हो छवि को दांव में लगा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भ्रष्टाचार के मामलों में बहुत सख्त माना जाता है। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री पार्टी की बिगड़ती छवि को कैसे सुधारते हैं।क्योंकि बीजेपी के पूर्व  विधायक सुरेश राठौर की पत्नी होने का दावा करने वाली उर्मिला सनावर ने फिर एक और वीडियो जारी कर सीएम धामी और बीजेपी को चुनौती दी है।उसका कहना है कोई AI से न विडियो बना है और ना ही ऑडियो बना है।खुले आम चुनौती दे रही है कि कोई साबित करे कि झूठ है।उत्तराखंड में कांग्रेस ने अंकिता हत्याकांड को बड़ा मुद्दा बना लिया है।महिलाओं में बीजेपी को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।गढ़वाल मंडल हो या कुमायूं मंडल बीजेपी के लिए उत्तराखंड के मौजूदा नेतृत्व को बचा पाना अब मुश्किल हो गया है।लोग गुस्से में हैं।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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