हिंदू श्री फाउंडेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी
द संडे मेल
नई दिल्ली।: हिंदू श्री फाउंडेशन ने आज केंद्र सरकार से संस्कृत को “अल्पसंख्यक भाषा” का दर्जा देने का आग्रह किया। फाउंडेशन का मानना है कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शास्त्रीय साहित्य को पुनर्जीवित करने और उसे फिर से खोजने के लिए यह कदम आवश्यक है।

राजधानी में आयोजित अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में, हिंदू श्री फाउंडेशन ने कहा कि अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार संस्कृत को “अल्पसंख्यक भाषा” का दर्जा दे ताकि इस भाषा को बचाया जा सके, जो हमारी प्राचीन सभ्यता में गहराई से रची-बसी है।
हिंदू श्री फाउंडेशन के संस्थापक और संयोजक डॉ. कौशल कांत मिश्रा ने कहा, “संस्कृत भारत के पारंपरिक ज्ञान का आधार और दुनिया की कई भाषाओं की जननी है। लेकिन बीते वर्षों में इसने अपना महत्व खो दिया है। इसके संस्थागत समर्थन, प्रचार और संरक्षण के लिए अल्पसंख्यक दर्जा अनिवार्य है।”
उन्होंने आगे कहा, “संस्कृत केवल हमारे दार्शनिक और धार्मिक विषयों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद से लेकर विज्ञान, योग, खगोल विज्ञान, ज्योतिष, कला और शिल्प जैसे सभी महत्वपूर्ण विषयों को समेटे हुए प्राचीन समय का खजाना है। आज इन सभी विषयों का बहुत महत्व है और ये छात्रों को इन क्षेत्रों में अपने ज्ञान को बढ़ाने और उसे खोजने में मदद कर सकते हैं।”
बैठक में हिंदू श्री फाउंडेशन को जन-जन तक पहुँचाने तथा राज्य एवं जिला स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने की रणनीतियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) शिव कीर्ति सिंह ने सुझाव दिया कि हिंदू श्री फाउंडेशन से संबंधित प्रचार सामग्री हिंदी, अंग्रेज़ी और संस्कृत में प्रसारित की जाए, ताकि संगठन की विचारधारा और गतिविधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार हो सके।
एचएसएफ के पदाधिकारी एवं पूर्व नौकरशाह चितरंजन खेतान ने प्रस्ताव रखा कि आगामी कुंभ मेले में हिंदू श्री फाउंडेशन के विशेष शिविर लगाए जाएँ। इन शिविरों में धार्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक गतिविधियों के साथ-साथ हिंदू हितों से जुड़े विषयों पर जनजागरण एवं एडवोकेसी अभियान चलाए जाएँगे।
लोगों को डिजिटल रूप से संगठन से जोड़ने के लिए वरिष्ठ सदस्य जितिन जैन एचएसएफ का गूगल पेज और गूगल फॉर्म तैयार करेंगे, जिससे पंजीकरण और समन्वय की प्रक्रिया सरल होगी। इस कार्य के लिए एचएसएफ के अध्यक्ष डॉ. शिव चौधरी चार सदस्यीय समिति का गठन करेंगे।
यह निर्णय लिया गया कि जिन जिलों में एचएसएफ के सदस्य सक्रिय हैं, वहाँ वे स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर संगठन को मजबूत कर सकते हैं। आलोक मोहन नायक ने सुझाव दिया कि सक्रिय कार्यकर्ताओं को पहले कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय निकाय से जोड़ा जाए और बाद में राज्य स्तरीय कार्यकारिणियों के गठन के पश्चात उन्हें संबंधित प्रकोष्ठों में शामिल किया जाए।
बैठक में एक व्यापक “हिंदू सांस्कृतिक कैलेंडर” तैयार करने का भी निर्णय लिया गया, जिसके आधार पर एचएसएफ वर्षभर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगा।







