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निशाने पर आए धामी,इस्तीफे की मांग ने पकड़ा जोर 

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प्रदेशभर में सीएम के खिलाफ बढ़ता गुस्सा,नारेबाजी

 

द संडे मेल

देहरादून।उत्तराखंड में चल रहे युवा बेरोजगारों के आंदोलन को  हर उम्र,हर वर्ग, समुदाय का खुल कर समर्थन मिलने लगा है।उत्तराखंड राज्य बनने के बाद का अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन माना जा रहा है।नाराजगी के मुख्य केंद्र में अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आ गए हैं।उनको हटाने की मांग ने पूरे प्रदेश में जोर पकड़ लिया है।आलाकमान ने जल्द फैसला नहीं किया तो हालात काबू से बाहर हो सकते हैं ।धामी के खिलाफ गुस्से की कई वजह हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धामी को चुनाव हारने के जब मुख्यमंत्री बनाया तो सवाल तब भी उठे थे।लेकिन कोई खुल कर नहीं बोला।प्रधानमंत्री मोदी को उम्मीद थी कि युवा चेहरे को मौका दिया गया है।ईमानदारी से सबको साथ ले सरकार चलाएंगे।लेकिन ऐसा नहीं हुआ।शुरुआत में ही पार्टी के भीतर ही भेदभाव किया जाने लगा।मंत्रियों और विधायकों की अधिकारियों ने सुननी ही बंद कर दी।राज्य के मौजूदा और पूर्व सांसदों की अनदेखी की जाने लगी।अफसरशाही पूरी तरह से हावी हो गई।इसका नतीजा यह हुआ कि पार्टी के भीतर ही नाराजगी बढ़ने लगी।लेकिन सीएम धामी अपने हिसाब से फैसले करने लगे।हालात पर नियंत्रण कम होने लगा।धामी के कार्यकाल में ही पहाड़ बनाम मैदान हुआ।एक वरिष्ठ मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।पेपर लीक आंदोलन के दौरान भी  पहाड़ बनाम मैदान कर फूट डालने की कोशिश की गई जिसे आंदोलनकारियों ने सफल नहीं होने  दिया।पहाड़ बनाम मैदान के दौरान ही भ्रष्टाचार और घोटालों का खेल शुरू हुआ।इसी के चलते मौजूदा और पूर्व सांसदों ने सरकार पर खुल कर खनन में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

  पहाड़ में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा बन गया।कांग्रेस,उत्तराखंड क्रांति दल  ने सीएम पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।देहरादून में आंदोलनकारियों की कमान संभालने वाले बॉबी पंवार ने तो सोशल मीडिया में खुले आम अफसरों और काम दिलाने वालों के नाम उजागर भी किए।मतलब भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा बन गया।

उत्तराखण्ड को लेकर हाई कोर्ट के जज राकेश थपलियाल की पिछले दिनों गैरसैण पर की गई टिप्पणी सब कुछ बता देती है।नेताओं को हिदायत दे जज थपलियाल ने कहा कि  गैरसैण में 8000 करोड़ का इन्फ्रास्ट्रक्चर बना हुआ है।नेताओं को केवल ब्रीफ केस लेकर जाना है।अगर उत्तराखंड की राजधानी पहाड़ पर बनी होती तो गांव गांव में स्कूल होते, लाइट होती ,अस्पताल होते।नेताओं की नजर में सब कुछ देहरादून है।

 दरअसल जज थपलियाल ने सच्चाई उजागर की।लेकिन नेताओं पर कोई असर नहीं पड़ा।  उत्तराखंड की समस्या की असल जड़  देहरादून को राजधानी बनाना ही है।दिल्ली के जंतर मंतर में तो राजधानी गैरसैण बनाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन भी शुरू हो गया।भ्रष्टाचार और उपेक्षा से पहाड़ियों में गुस्सा है।उत्तराखण्ड सरकार ने गैर पहाड़ियों को विकास के नाम पर अरबों के काम दे दिए ।उसी का नतीजा हुआ कि पहाड़ पर हर तरह के माफिया का कब्जा हो गया।पहाड़ के लोगों को न सड़क मिली,न बिजली पानी मिला और ना ही स्वास्थ्य की सुविधा। सब कुछ भ्रष्टाचार की राजधानी देहरादून में होने लगा।भ्रष्टाचारियों ने जमीन,पानी,नदियों को तो कब्जाया बच्चों के भविष्य से भी खिलवाड़ कर दिया।उसी भ्रष्टाचार की देन पेपर लीक है।

  पेपर लीक पर हाई कोर्ट के जज थपलियाल ने जो बोला वह आंखे खोलने वाला है।उन्होंने उत्तराखंड चयन आयोग को कड़ी फटकार लगाते हुए तंज कसा की पेपर लीक मत होने देना।जज थपलियाल की कड़ी फटकार ने पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी।

 पूरे प्रदेश में आंदोलन कर रहे युवा बेरोजगारों की सीबीआई की मांग सरकार इसीलिए नहीं स्वीकार रही है कि जांच में कहीं एक लीड मिल गई तो फिर बाकी मामले भी खुल जाएंगे।सरकार की एसआईटी को आंदोलनकारियों ने मानने से इनकार कर दिया है।मुख्यमंत्री धामी जो भी कोशिश कर रहे हैं उससे वह खुद निशाने पर आ गए हैं।लक्सर से नौजवानों को बुलाना,नकल जेहाद बोलना,सीबीआई जांच से पांच साल तक पेपर नहीं होना जैसे बयानों से धामी खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं।धामी के खिलाफ राज्यभर में प्रदर्शन और नारेबाजी होने लगी है।पूर्व सीएम और सांसद त्रिवेंद्र रावत ने सीबीआई जांच को सही ठहराया है।लेकिन बाकी दूसरे बड़े नेता और मंत्रियों ने चुप्पी साध ली है।दिल्ली पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है।  दिल्ली में भी धरने प्रदर्शन होने लगे हैं।इसी पर नजर है कि सीएम धामी को दिल्ली कब बुलाया जाता है।समाप्त

The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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