नई दिल्ली।बिहार चुनाव में इस बार बीजेपी और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा तो दांव पर लगी हुई है। लेकिन वहीं दोनों दलों के राजनीति के चाणक्य समझे जाने वाले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए भी चुनाव बहुत अहम हो गया है।शाह बीजेपी खेमे के तो गहलोत कांग्रेस खेमे के राजनीति के चाणक्य माने जाते हैं।दोनों नेता 24×7 काम करने में विश्वास करते है।वरिष्ठता के मामले में गहलोत बीजेपी के शाह से काफी वरिष्ठ हैं।गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री, केंद्र में मंत्री,पार्टी में विभिन्न पदों में रहे है।उनके मुकाबले शाह काफी जूनियर हैं।लेकिन शाह सफलता दिलवाने के मामले में ज्यादा सफल रहे हैं।उसकी बड़ी वजह है शाह के पीछे एक मजबूत संगठन है।दूसरा केंद्रीय नेतृत्व और पार्टी का पूरा समर्थन शाह के पीछे रहता है।इसलिए कठिन दिखने वाली जीत को बीजेपी आसान बना देती है। लेकिन वहीं दूसरी और कांग्रेस में इसके उल्ट है।जैसा समर्थन और सहयोग चाहिए नहीं मिलता है।इसलिए आसान दिखने वाली जीत भी हार में बदल जाती है।राजस्थान,हरियाणा,महाराष्ट्र इसके ताजा उदाहरण हैं।इन तीनों राज्यों में हार की एक प्रमुख वजह केंद्रीय नेतृत्व की गलत रणनीति और गलत फैसले ही रहे हैं।
राजस्थान में 2023 का चुनाव कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व से तमाम गलत फैसलों के चलते हारी।गहलोत ने उस समय अपनी सरकार के लोकप्रिय फैसलों से एक बार के लिए बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को चिन्ता में डाल दिया था।लेकिन कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से पहली बड़ी भूल गुटबाजी को हल्के में लेना था।केंद्र ने अपने सीएम गहलोत की मदद करने के बदले सरकार गिराने वालों का साथ दिया।उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में गहलोत को उलझा दिया।गांधी परिवार समझ ही नहीं पाया कि बाहरी ताकतें गहलोत को कमजोर करना चाहती हैं।लेकिन कांग्रेस का सर्वोच्च नेतृत्व साजिश में उलझता गया।गहलोत के खिलाफ तमाम साजिशों के बाद भी बीजेपी को चुनाव जीतने के लिए सांप्रदायिकता का ही आखिर में सहारा लेना पड़ा।गहलोत उस समय चुनाव जीत जाते तो शायद आज राहुल गांधी को कांग्रेस की विचारधारा से अलग हट जात पात की राजनीति नहीं करनी पड़ती।वोट चोर जैसे मुद्दे नहीं उठाने पड़ते।राजस्थान में बीजेपी के चाणक्य अमित शाह को इसलिए सफलता मिली कि उनके पीछे पूरी पार्टी और केंद्रीय नेतृत्व खड़ा था।
राजस्थान की तरह ही बीजेपी ने हरियाणा और महाराष्ट्र में अंदरूनी लड़ाई का पूरा फायदा उठाया।कांग्रेस की एक एक गलती को बीजेपी ने सही ढंग से भुनाया।राहुल गांधी अब जो भी कहें कांग्रेस को वोटिंग से पहले ही आभास हो गया था कि हरियाणा में चुनाव हार रहे हैं। दलित और ओबीसी का वोट कांग्रेस को नहीं मिला।महाराष्ट्र में भी सहयोगियों की खींचतान ने कांग्रेस को हराया।अब बिहार में एक बार फिर गहलोत की रणनीति का मुकाबला शाह की रणनीति से है।गहलोत ने जिम्मेदारी संभालने के बाद चुनाव को टक्कर वाला बनाने में सफलता तो पाई है।एक तरफा चुनाव टक्कर वाला बन गया।लेकिन वहीं कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने पुरानी गलतियां कर कुछ मुश्किलें पैदा की हैं।कांग्रेस के सर्वोच्च नेता राहुल गाँधी जो राजनीति कर रहे हैं उससे पार्टी को लाभ कम मिलता दिख रहा है।क्योंकि राज्य के चुनाव में केंद्र के मुद्दे कम चलते हैं।गहलोत ने कोशिश कर चुनाव दिलचस्प तो बना दिया है अब देखना होगा कि कौन चाणक्य सफलता दिलाता है।