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शाह के उत्तराखंड दौरे से बिगड़े हालातों पर कोई असर नहीं

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पांडे की सभा में उमड़ी भीड़,बीजेपी के नाराज धड़े का मिला समर्थन
द संडे मेल
देहरादून।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिन का दौरा कर भले ही दिल्ली लौट गए।लेकिन उत्तराखंड के हालात में कोई सुधार नजर नहीं आ रहे हैं।आलाकमान के दखल के बिना स्थिति सुधरेगी भी नहीं।बीजेपी के अंदर सीएम धामी के खिलाफ अब अपने भी खुल कर मैदान में आ गए हैं।कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष पहले से ही सड़कों पर है।आमजन के डर से मंत्री ,विधायक अपने इलाकों में जा नहीं पा रहे हैं।जनता खुल कर घेराबंदी कर रही है।बीजेपी के राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले गृहमंत्री शाह सारे घटनाक्रम की जानकारी न हो ये हो नहीं सकता।शाह अपने तरीके से समय आने पर कार्रवाई करते है।उत्तराखंड भले ही छोटा राज्य हो लेकिन बीजेपी जीत के लिए कैसे भी बदलाव कर बड़े से बड़ा कदम उठाने  में देरी नहीं करती है।त्रिपुरा और गुजरात बड़े उदाहरण हैं।अब यही देखना होगा कि शाह दिल्ली में अब कब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट दे कड़े फैसले जैसा कदम उठवाते हैं।
  अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राज्य में पहले से ही बीजेपी के खिलाफ भारी नाराजगी बनी हुई है।अब उद्यमसिंह नगर के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या ने किसान आंदोलन खड़ा कर दिया है।इस आंदोलन को बीजेपी विधायक अरविंद पाण्डे एक प्रकार लीड कर रहे हैं।अपनी सरकार के खिलाफ पांडे ने गुरुवार को गदरपुर में विशाल जनसभा का आयोजन कर अपनी ताकत का अहसास करा दिया।इस रैली में सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी शामिल होना था।
उन्होंने अपने कार्यक्रम में सांसद अनिल बलूनी और विधायक मदन कौशिक के साथ जाने की सूचना भी जारी कर दी थी।सूत्र बताते है कि गढ़वाल मंडल के अधिकाशं विधायकों ने भी रैली में शामिल होना था।लेकिन शाह के हरिद्वार दौरे और आलाकमान के दखल के चलते ये नेता वहां नहीं गए।लेकिन इससे साफ हो गया है कि पार्टी का बड़ा धड़ा सीएम धामी के खिलाफ है।महिलाओं के साथ किसानों की नाराजगी बीजेपी को भारी पड़ सकती है।उधम सिंह नगर सीएम धामी का गढ़ कहा जाता था। खटीमा से वह चुनाव जीतते थे।लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।किसान सुखवंत की आत्महत्या की जांच सीबीआई से कराने की कर रहे हैं।किसान आंदोलन तराई के इलाके में अगर तेजी से फैलता दिख रहा है।सीएम धामी की सरकार के खिलाफ उत्तराखंड के हर इलाके में नाराजगी बढ़ती ही जा रही है।जिसका लाभ कांग्रेस को मिलता दिख रहा है।
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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