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उत्तराखंड = अपराधियों में पुलिस का भय खत्म

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सरकार बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर मौन, छात्रा के अपहरण की कोशिश
परेड ग्राउंड के पास दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या

 

द संडे मेल
देहरादून। यहां डालनवाला क्षेत्र में स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल के बाहर 11 वीं की एक छात्रा के अपहरण की कोशिश की घटना ने उत्तराखंड की कानून व्यवस्था को फिर सवालों के घेरे में ला दिया है।इसी बीच बुधवार को परेड ग्राउंड पास एक व्यक्ति की दिन दहाड़े गोली मार कर हत्या से सनसनी फैल गई।मृतक का नाम अर्जुन शर्मा बताया गया है।बीते दो हफ्ते में दिन दहाड़े हत्या की  चौथी घटना है।पहाड़ से सटे मैदानी शहरों में लगातार आपराधिक  घटनाएं बढ़ी हैं।पुलिस पर सवाल उठ रहे है।यहां तक शिकायतें हैं कि पुलिस आधे से ज्यादा केस दर्ज ही नहीं करती है। घटने वाली घटनाएं ही दर्ज की जाती हैं, बाकी को दबा दिया जाता है।साइबर क्राइम के मामलों में तो पुलिस पीड़ितों को गुमराह कर भटकाने के अलावा कुछ नहीं करती है।पहाड़ों में बढ़ते अपराध की सबसे बड़ी वजह है देशभर के माफियाओं के लिये सुरक्षित ठिकाना।जब से उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्य नाथ ने शिकंजा कसा है तब से अपराधियों ने उत्तराखंड को अपना ठिकाना बना लिया है।शराब,जमीन,खनन,वन और अवैध होटल माफिया के अवैध कारोबार पर सरकारी तंत्र का सबसे ज्यादा ध्यान रहता है।क्योंकि अवैध कमाई का सबसे बड़ा माध्यम यही होते है।देहरादून,ऋषिकेश,हरिद्वार,
कोटद्वार,रामनगर,हल्द्वानी,उधम सिंह नगर में पोस्टिंग पाने के लिए अफसर को बहुत कुछ करना होता है।इसलिये कानून व्यवस्था को लेकर कितने भी सवाल उठ जाएं सरकार अफसरों को बहुत ज्यादा नहीं छेड़ती है।क्योंकि अतरिक्त कमाई का बड़ा माध्यम मैदानी क्षेत्र के अफसर ही होते हैं।नदियों के खनन की स्थिति तो यह है कि शहर के बीच की नदियों को पुलिस की नाक के नीचे खोदा जाता है। पुलिस का कोई भय अपराधियों में  नहीं रहा।
   महिलाओं की लगातार हुई हत्याओं के बाद एसएसपी देहरादून को हटाने की मांग हुई लेकिन सरकार ने दूसरे मुद्दे उठा ध्यान बांट दिया।मेलों का आयोजन किया गया और दूसरे मुद्दे उठा दिये गये।इसी प्रकार उधमसिंह नगर में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या ने पूरी पुलिस व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी।सुखवंत ने मरने से पूर्व पूरे भ्रष्टाचार तंत्र को उजागर किया था।आंदोलन हुए,विपक्षी दलों ने एसएसपी को हटाने की मांग की।लेकिन कुछ नहीं हुआ।
 कोटद्वार में मोहम्मद दीपक की घटना ने वहां तैनात पुलिस अफसरों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में ला दी।लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटद्वार के मामले को चुनावी मुद्दा बना हिंदू ध्रुवीकरण की राजनीति को तूल देना शुरू कर दिया।कई घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। और अब देहरादून में स्कूल की छात्रा को नशे का इन्जेक्शन दे उठाने की कोशिश ने भय का वातावरण बना दिया।हालांकि छात्राओं की हिम्मत के चलते अपराधी अपहरण नहीं कर पाए।लेकिन पॉश इलाके में घटी इस घटना से बच्चों में भय है।इन दिनों बच्चों के गायब होने के बढ़ते मामलों की रिपोर्ट से बच्चे पहले ही डरे हुए हैं।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार बढ़ते अपराधों को लेकर अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठा पाई जिससे अपराधियों में भय फैलता।उल्टा अपराधियों के लिये अब उत्तराखंड सुरक्षित ठिकाना बन गया है।अंकिता भंडारी हत्याकांड ने तो पूरी व्यवस्था की पोल खोल कर रखी हुई है।अंकिता के असल हत्यारों और वीआईपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर राज्य में आंदोलन चल रहा है।
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The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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