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कैग ने उत्तराखंड में भ्रष्टाचार की पोल खोली

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बीजेपी आलाकमान तक पहुंची रिपोर्ट
द संडे मेल
नई दिल्ली।इसी माह उत्तराखंड विधानसभा में पेश की गई कैग रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमिताओं के सामने आने से बीजेपी आलाकमान को भी चिंता में डाल दिया है।करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार के मामले रिपोर्ट में उजागर किए गए हैं।पैसे की बर्बादी किस तरह की गई रिपोर्ट ने एक एक मामले को उजागर किया।सरकार का एक भी विभाग कैग की रिपोर्ट से नहीं बच पाया। अधिकांश विभागों ने जनता के पैसे की कद्र ही नहीं की है।रिपोर्ट बहुत चिन्ता बढ़ाने वाली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के लिए यह रिपोर्ट बड़ी परेशानी बढ़ाने वाली है।चुनाव साल में कैग की रिपोर्ट विपक्ष की तरफ से लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के मुद्दों को और ताकत देगी।हालांकि बीजेपी में इन दिनों कई तरह के मंथन चल रहे है,राज्यों के मामले भी उसमें शामिल है।लेकिन पहली प्राथमिकता पांच राज्यों के चुनाव है।उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार और संगठन को लेकर कई अहम फैसले कर सकते हैं।उत्तराखंड को लेकर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व बहुत गंभीर है।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हरिद्वार दौरे से संकेत मिल गए थे कि केंद्र में धामी सरकार को लेकर कितनी नाराजगी है। मई में पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद पीएम मोदी क्या फैसला करते हैं पता चलेगा।भ्रष्टाचार,बिगड़ी कानून व्यवस्था,अंकिता भंडारी हत्याकांड,महिलाओं पर बढ़ते अपराध जैसे मुद्दों ने बीजेपी की चिन्ता पहले ही बढ़ाई हुई थी।अब कैग की रिपोर्ट ने परेशानी बढ़ा दी है।रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने 2005-2024 के बीच बिना विधानसभा की मंजूरी के ₹55,000 करोड़ से अधिक खर्च किए हैं। इसके अलावा स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों के घोटाले, नमामि गंगे, हरिद्वार कुंभ (2021) और मनरेगा योजनाओं में भी बड़ी गड़बड़ियां पाई गई हैं। कैग की रिपोर्ट के अनुसार अकेले 2023=2024 में यह बिना बजट का खर्च 7300 करोड़ रहा।28 विभागों में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई है।गंगा सफाई मिशन (नमामि गंगे) के लिए केंद्रीय सहायता के बावजूद, क्रियान्वयन एजेंसियों की विफलता और सीवर लाइन के कार्यों में अनियमितताओं के कारण गंगा नदी प्रदूषित बनी हुई ।28 विभागों द्वारा ₹2,366 करोड़ का अनुपूरक अनुदान खर्च न कर वापस किया गया, जिसे वित्तीय कुप्रबंधन माना जा रहा है। कोविड के समय मेडिकल उपकरणों में 87 लाख की गड़बड़ी सामने आई है।यही नहीं अस्थाई सड़कों के नाम पर 5.56 करोड़ और देहरादून स्मार्ट सिटी के नाम पर 10 करोड़ का घोटाला सामने आया है।  परिवहन विभाग में एक ही व्यक्ति को दो-दो ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और पर्वतीय लाइसेंस प्रक्रिया में बड़ी खामियां पाई गई हैं। विपक्ष ने इसे अब तक का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया है।मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।कांग्रेस इसे आगामी चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में जुट गई है
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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