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बीजेपी को नुकसान पहुंचाने वाली है धामी की राजनीति

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उत्तराखंड से हो सकती है हिन्दी बेल्ट में हार की शुरुआत
द संडे मेल
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं उससे आमजन में बीजेपी के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है।चुनाव साल में बीजेपी को आमजन की नाराजगी भारी पड़ सकती है।जानकारों की माने तो मुख्यमंत्री धामी जानबूझकर
 जन आक्रोश की अनदेखी कर रहे हैं?यही नहीं राज्य बनने के 25 साल बाद देशी बनाम पहाड़ी की लड़ाई ने आखिरकार जन्म ले ही लिया। इसके चलते एक मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा तो इन दिनों चल रहे विधानसभा के विशेष सत्र में विधायकों के बीच आमने सामने का टकराव भी  देखने को मिला।इससे कहीं ना कहीं धामी सरकार की कमजोरियां उजागर हुई।सीएम धामी के इस रवैए के पीछे दो वजह सामने आ रही हैं।एक तो सीएम धामी लगता हैं कि उन्हें कभी भी हटाया जा सकता है।इसलिए वह  बिगड़ते हालातों और आमजन के गुस्से से ज्यादा चिन्तित नहीं है।दूसरी चर्चा यह है कि धामी जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपने आप पार्टी को चुनाव जितवाएंगे।इसलिए उनका फोकस अपनी और सरकार की छवि को विज्ञापनों के माध्यम से चमकाने पर है।प्रमुख मीडिया विज्ञापनों के चलते पहाड़ के बिगड़ते हालात का पूरा सच नहीं दिखा रहा है। 9 नवंबर को उत्तराखंड 25 साल का हो जाएगा। इस मौके पर सरकार छवि चमकाने और राज्य को विकसित राज्य बताने पर करोड़ों खर्च करेगी। स्वाभाविक है कि धामी सरकार बताने की कोशिश करेगी सबसे ज्यादा विकास उन्होंने किया।जबकि सच्चाई इसके उल्ट है।

   बीते पांच साल में राज्य की हालत ज्यादा बिगड़ी है।खनन,शराब, वन,जमीन और होटल माफिया ने पहाड़ को बड़ा नुकसान पहुंचाया। विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर पहाड़ को खोखला कर दिया गया है।धामी सरकार ने भी बीते पांच साल में विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर अंधाधुंध तरीके से ऐसे फैसले किए जिससे पहाड़ वासी को तो कुछ नहीं मिला लेकिन बाहरी लोगों ने जमकर धंधा किया।नियम, कायदे कानून ताक में है रख बाहरी लोगों को करोड़ों का काम आबंटन कर दिए गए।इससे आमजन में गुस्सा बढ़ता गया।यहीं से देशी बनाम पहाड़ी के मुद्दे ने जन्म लिया।सरकार ने मूलभूत सुविधाओं के बजाए दूसरे कामों को महत्व दिया।जिसके चलते
पहाड़ वासी को मूलभूत सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा। शिक्षा,स्वास्थ्य,बिजली,पानी,सड़कों पर ध्यान ही नहीं दिया गया।शराब माफिया के खिलाफ ऋषीकेश में महिलाएं बच्चे सड़कों पर है।सरकार को चिन्ता नहीं है।चौखुटिया के आंदोलनकारी जब सीएम के दरवाजे पर पहुंच गए तब सीएम धामी चेते।फिलहाल 6 माह का भरोसा दे पीछा छुड़ाया है।6 माह बाद चुनाव करीबी आ जाएंगे।हो सकता दिसंबर में ही राजनीति बदल जाए।
  राजनीति में बदलाव की चर्चा का असर पूरे प्रशासन और उनके मंत्रियों और विधायकों में भी देखा जा रहा है।अधिकारी इंतजार करो और देखो की नीति पर चल रहे हैं।उन्हें लगता है इन हालात में कुछ तो बदलाव होगा।इसलिए चुपचाप जनता के गुस्से को सहन कर रहे हैं।जहां तक मंत्रियों का सवाल है तो वह भयभीत बताए जाते हैं।उन्हें लगता है कि गुजरात की तरह  सभी को ऊपर से लेकर नीचे तक बदल दिया जाएगा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गुजरात में ऐसा कर चुके हैं।एक बार सीएम समेत सभी मंत्रियों को बदल दिया गया था।इस बार मंत्रियों में बदलाव किया गया।दूसरी और अधिकांश विधायक गुस्से में भी और डरे हुए भी हैं।गुस्से में इसलिए है कि उनका मुखिया कुछ नहीं कर रहा है। डरे हुए इसलिए है कि अगला चुनाव कैसे जीतेंगे।क्योंकि जनता सवाल पूछेगी।दस साल की एंटी इंकनवेसी का कोई जवाब सरकार के पास नहीं है। प्रदेश का अधिकाशं इलाका आंदोलन की चपेट में है ही।जनता में धामी के खिलाफ तो गुस्सा था ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके निशाने पर आ गए हैं।चुनाव साल में जो हालात बनते जा रहे उसमें बीजेपी के नेताओं का इलाकों में घुसना और प्रचार करना भी मुश्किल हो जाएगा।लड़ाई पहाड़ बनाम मैदान का रूप भी धारण करती जा रही है।जो न तो राज्य हित में है और ना ही बीजेपी के।
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The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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