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पीएम मोदी बोल रहे थे, जनता कुर्सी छोड़ जाने लगी

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पीएम मोदी बोल रहे थे, जनता कुर्सी छोड़ जाने लगी
सीएम के खिलाफ कहां की जनता है गुस्से में
द संडे मेल

देहरादून।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य स्थापना के 25 साल पूरे होने के मौके पर तमाम करोड़ों रुपए देने की घोषणा तो कर गए,लेकिन कुछ जनता की नाराजगी का अहसास करके वापस लौटे होंगे।पीएम मोदी एक बार वह चुने गए जनप्रतिनिधियों से अलग से बात कर लेते तो शायद सच पता चल जाता। क्योंकि अधिकांश नेता यही बताते जिस व्यक्ति पर भरोसा कर उन्होंने सीएम बनाया था वह भरोसे पर खरे नहीं उतरे।क्योंकि आज मौजूदा दौर में उत्तराखंड जिस दौर से गुजर रहा है वह बहुत ही चिंताजनक स्थिति में हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने आज खुद भी अपने भाषण के दौरान की स्थिति देख समझ लिया होगा कि राज्य में सब गड़बड़ चल रहा है।पहली बार उत्तराखंड की जनता  पीएम मोदी के भाषण के बीच में उठ कर जाने लगी थी।खाली चेयर भी काफी कुछ गुस्से का संकेत दे रही थी।बाकी आईबी अपनी रिपोर्ट दे स्थिति बताएगी । प्रधानमंत्री मोदी का दिया नारा सबका साथ सबका विकास उत्तराखंड में तार तार हो चुका है।प्रधानमंत्री मोदी ने हारे हुए विधायक पुष्कर सिंह धामी को जिस उम्मीद से फिर मुख्यमंत्री बनाया था वह पूरी तरह से असफल रहे हैं।धामी ने बीते पांच साल में क्या किया अगर प्रधानमंत्री मोदी शोशल मीडिया का एक बार अध्ययन कर लेंगे तो सच्चाई सामने आ जाएगी।बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी खुद सोशल मीडिया पर भरोसा करते हैं।सोशल मीडिया के सहारे बीजेपी ने इतनी ऊंचाइयां पाई हैं।

 पूरा उत्तराखंड तो मूलभूत सुविधाओं को लेकर आंदोलन से सुलग ही रहा है। अब चुनाव साल में मैदानी बनाम पहाड़ का टकराव शुरू हो गया है।पहाड़ बनाम मैदान अभी आम आदमी खुल कर नहीं कर रहा है लेकिन नेताओं ने शुरू कर दिया है।राज्य स्थापना के 25 साल पूरे होने के मौके पर विधानसभा के विशेष सत्र में दिए विधायकों के भाषण में टकराव की जमकर बातें हुई।बसपा विधायक मोहमद शहजाद ने सदन में जो बोला या जो बोल रहे है वह एक दम कड़वा सच है।मंत्री विधायक बनते ही लगभग सारे नेता पहाड़ छोड़ देहरादून या फिर हल्द्वानी के तराई क्षेत्र में पहुंच बड़े बड़े घर बनाते हैं।फॉर्म हाउस लेते हैं।फिर मौका मिल गोवा या दूसरे इलाके में होटल और दूसरे कारोबार खोलते हैं।मतलब जिसे मौका मिलता है वह लूट खसूट में जुट जाता है। बसपा विधायक ने एक ओर सच्चाई को सही उजागर किया ।मंत्री विधायकों की पत्नी जो नौकरी करती हैं,रिश्तेदार सभी मैदानी इलाकों में पोस्टिंग पाते हैं।इनकी देखा देखी अफसर भी उसी रास्ते में चलते है। पलायन रोकने के लिए बनाया पलायन आयोग के अफसर खुद पुश्तैनी घर बेच देहरादून रहने लगे हैं।सदन में हुईं चर्चा में जब बसपा विधायक पहाड़ से चुन कर आने वाले विधायकों की सच्चाई उजागर कर रहे थे तो बीजेपी विधायक किशोर उपाध्याय ने गुस्से में  गंगा का पानी रोकने की बात कह और विवाद खड़ा कर दिया।अब  बीजेपी के मैदानी नेता धमकी देने लगे पहाड़ के रास्ते रोक देंगे।इन बीजेपी नेता का नाम है प्रमोद खारी है।सोशल मीडिया में बयान खूब वायरल हो रहा है।यही नहीं अलग अलग मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे आंदोलन कारी सीएम धामी के इस्तीफे की मांग करने लगे।आमजन में गुस्सा इतना है कि बीजेपी के प्रत्याशियों का गांव में घुसना मुश्किल हो जाएगा।आंदोलनकारी कहने लगे हैं काश योगी आदित्यनाथ उनके सीएम होते।कम से कम पहाड़ में गुंडों पर अंकुश लगता।
  अब सवाल यह है कि ऐसे हुआ क्यों?कौन जिम्मेदार है? स्वाभाविक है मुखिया जिम्मेदार होगा।प्रदेश के मुखिया आज के दिन पुष्कर सिंह धामी हैं।विधानसभा चुनाव हारने के बाद प्रधानमंत्री मोदी धामी को फिर से जैसे ही सीएम घोषित किया उससे यह संदेश चला गया कि आलाकमान के बहुत करीब हैं ।प्रधानमंत्री मोदी उम्मीद कर रहे थे कि धामी युवा हैं सब को साथ ले राज्य का ईमानदारी से विकास कराएंगे।लेकिन ऐसा हुआ नहीं है।जैसा होता आया है कि मौका मिलते ही पहाड़ के विकास को सब भूल जाते हैं।वहीं धामी ने किया।गैर पहाड़ी अफसरों और दिल्ली से दिशा निर्देश देने वालों ने पहाड़ की मूलभूत सुविधाओं और विकास पर ध्यान देने के बजाय दूसरे बड़े बड़े प्रोजेक्टों और बाहरी कंपनियों को निहाल करने पर जोर दिया।सीएम धामी ने भी असल मुद्दों को छोड़ दिया।वह अपने को मजबूत करने में जुट गए।पार्टी के भीतर आवाजें उठी तो पहले क्षेत्रवाद की राजनीति हुई और अब पहाड़ी बनाम गैर पहाड़ी की राजनीति शुरू हो गई ।इससे पहाड़ में चल रहे आंदोलनों और गुस्से से ध्यान बांटने की कोशिश हुई।सीएम धामी की सरकार आंदोलन को दबाने या भटकाने में लग गई।लेकिन पहाड़ के हालात बहुत गंभीर हो गए हैं।अच्छा हो प्रधानमंत्री मोदी देहरादून दौरे पर कुछ सच्चाई जानने की कोशिश कर जल्द निर्णय ले।मौजूदा चेहरे मोहरों से बीजेपी का नुकसान तय है।समाप्त
The Sunday Mail
Author: The Sunday Mail

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